चोरी करने पर मुर्गा बनाया - Hindi Murga Punishment Stories
नमस्ते दोस्तों! मेरा नाम किरण है, मैं दिल्ली की रहने वाली हूँ। आज मैं आप सबको अपनी एक रियल मुर्गा पनिशमेंट वाली कहानी सुनाने जा रही हूँ, जो करीब 3 महीने पहले की है। ये पूरी तरह सच है (फैंटेसी स्टाइल में लिख रही हूँ ताकि मजा आए)। पढ़कर बताना कैसी लगी!
सबसे पहले थोड़ा बैकग्राउंड: मैं उस समय एक मिस्टर खन्ना के घर में पार्ट-टाइम जॉब करती थी। घर के काम-काज, सफाई वगैरह। एक दिन उन्होंने मुझे काम के सिलसिले में अपने घर बुलाया। वो मुझे काम देकर बाहर चले गए, लेकिन तिजोरी खुली छोड़ गए थे। अंदर नोटों की कई गड्डियाँ रखी थीं। मेरा मन ललचा गया... मैंने एक गड्डी निकाल ली और घर चली आई। अगले दिन भी यही किया। तीसरे दिन सब बदल गया!
उस दिन मिस्टर खन्ना ने मुझे फिर घर बुलाया। मैं खुशी-खुशी गई। जैसे ही पहुंची, उन्होंने अपना लैपटॉप खोला और एक वीडियो प्ले किया। वीडियो में साफ दिख रहा था कि मैं तिजोरी से पैसे निकाल रही हूँ! कैमरा लगा हुआ था! 😱 और वो बोले की मे अब पुलिस को भूला रहा हूं
और फिर मैं उनके पैरों में गिरकर रो रही थी, साहब प्लीज, पुलिस मत बुलाइए... जो कहेंगे वो करूँगी!
उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, अच्छा? कपड़े उतारो... सबके सब। और वहा कोने मे जाकर मुर्गा बन जाओ। मैं काँपते हाथों से ब्लाउज, पेटीकोट, ब्रा, पैंटी... सब उतार फेंका। नंगी होकर फर्श पर घुटनों के बल बैठ गई। दोनों कान पकड़े, कोहनियाँ घुटनों के बीच डाली... क्लासिक मुर्गा पोज। मेरी गांड ऊपर की तरफ उठी हुई थी, पूरी तरह एक्सपोज्ड।
मिस्टर खन्ना ने पहले तो मुझे ऐसे ही 20 मिनट देखा। फिर बोले, अभी तो शुरुआत है हरामखोर।
उन्होंने अलमारी से एक मोटा बाँस का दंडा निकाला – वो वाला जो स्कूलों में पुराने जमाने में इस्तेमाल होता था। लंबा, करीब 3 फुट, और काफी मोटा। पहला दंडा मेरी गांड पर पड़ा – धड़ाम! दर्द इतना तेज कि मैं चीख पड़ी, आआआह्ह्ह! शरीर झटका खा गया।
दूसरा... तीसरा... चौथा... वो लगातार मारते रहे। हर दंडे के साथ मेरी गांड पर लाल लकीरें पड़ती गईं। 10 दंडे पूरे होने तक मेरी गांड जल रही थी, सूज गई थी, और लाल-लाल होकर चमक रही थी। मैं रो रही थी, लेकिन मुर्गा पोज नहीं छोड़ा। फिर उन्होंने दंडा साइड में रखा और कहा, अब थप्पड़ों की बारी।
मैं घबराई, लेकिन वो मेरे बाल पकड़कर मेरा चेहरा ऊपर किया। चाँटा! पहला थप्पड़ गाल पर पड़ा – इतना जोरदार कि मेरा सिर इधर-उधर हो गया।
चाँटा! चाँटा! चाँटा! लगातार 5-6 थप्पड़ मारे। मेरा चेहरा जलने लगा, गाल लाल हो गए, आँखों से आँसू बहने लगे। वो रुक-रुक कर मारते, बीच में बोलते, चोरी करने वाली रंडी, अब रो रही है? और मारूँ? मैं सुबक रही थी, सॉरी साहब... बस कर दीजिए लेकिन वो नहीं रुके। फिर से मुर्गा पोज में आने को कहा। इस बार उन्होंने बेल्ट निकाली – चमड़े की मोटी बेल्ट। अब 30 बेल्ट लगेंगे गांड पर। हर 5 बेल्ट के बाद 5 थप्पड़।
और अगर पोज टूटा तो डबल!
और फिर 1-5 बेल्ट – मेरी गांड पर पट्टी जैसी निशान पड़ गए। दर्द से मैं काँप रही थी। फिर 5 थप्पड़ – बायाँ गाल, दायाँ गाल, फिर से बायाँ... मेरा मुँह सूज गया, होंठ कट गए। 6-10 बेल्ट – अब गांड नीली पड़ने लगी। मैं चिल्ला रही थी, आह्ह... नहीं साहब... दर्द हो रहा है!
फिर 5 और थप्पड़ – इस बार इतने जोर से कि मेरा सिर घूम गया, मैं गिरते-गिरते बची।
ऐसे ही 30 बेल्ट और बीच-बीच में 30 थप्पड़ पूरे हुए। मेरी गांड आग की तरह जल रही थी, बैठना मुश्किल था। चेहरा इतना लाल और सूजा कि आईने में देखकर खुद को पहचान नहीं पाई। फिर उन्होंने कहा, अभी खत्म नहीं हुआ। उठक-बैठक का टाइम।
कान पकड़कर 100 उठक-बैठक। हर बार नीचे जाते वक्त गांड पर हवा लगती, दर्द दोगुना हो जाता। 20-25 पर कान छूट गए। उन्होंने कहा, कान छूटा? 20 बेल्ट एक्स्ट्रा! फिर से शुरू। कुल मिलाकर 150 उठक-बैठक हुए, और एक्स्ट्रा 40 बेल्ट। मैं थककर हाँफ रही थी, पसीना-पसीना हो गई थी। अब आया सबसे इंटेंस पार्ट:
मुर्गा बनकर कमरे में 20 चक्कर लगाओ। हर चक्कर के बाद रुककर मेरे सामने आकर गांड दिखाओ, और बोलो – 'साहब, और मारिए'।
मैं मुर्गा बनकर घूमने लगी। हर चक्कर के बाद रुकती, गांड ऊपर करके दिखाती, और रोते हुए कहती, साहब... और मारिए 10 चक्कर के बाद वो फिर दंडा उठाए। इस बार गांड पर 10 और दंडे मारे – इतने जोर से कि मैं नीचे गिर पड़ी। वो बाल पकड़कर उठाए और बोले,
उठ! मुर्गा बन!
फिर आखिरी सजा: मुझे मुर्गा बनाकर उनके पैरों के पास बैठाया। उन्होंने अपने पैर मेरे मुँह में डाले – चाट! मैं चाटने लगी। फिर मेरी नाक उनके पैरों से रगड़वाई। आखिर में मुँह खुलवाकर थूक दिया, और कहा, अब से रोज ऐसा होगा। चोरी की सजा यही है। समझ आई?
मैं रोते हुए बोली, हाँ साहब... समझ आ गई।
और फिर सहाब ने बडे प्यार से मूंजे गले लगाकर मेरी आंखों से आंसू पोछे और कहा की तूम मेरी अछी नोकरानी थी मे तूम पे बरोसा करता था और तूमने ये किया तो मेने सहाब के पेर पकड़ के कहा मूजे माफ कर दो सहाब आगे से कभी एसी गलती का मोका नही दूंगी एक मोका दे दो और फिर सहाब ने कहा ठीक है पर तूमेसे कोई भी गलती होगी तो तूम खूद सजा लोगी
और सच में... अब तो ये सजा मुझे अच्छी लगने लगी है। दर्द के साथ एक अजीब सा मजा... गांड पर दंडे पड़ते हैं, मुँह पर थप्पड़ों की बरसात होती है, और मैं उनकी गुलाम बनी रहती हूँ। 😈
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