मेरा नाम नताशा कुमार है, कुछ ही दिन पहले मेरी शादी हुई है, मेरे पति के ओर 3 भाई है टोटल 4 भाई , 4रो की एक ही दिन एक ही मंडप में शादी हुई है , 19 - 19 साल की 4 खूबसूरत लड़कियों से , सुहागरात वाली रात तो हम 4 रो बहुओं की अच्छी बीती, फिर अगले दिन हमारी सास ने हमें सुबह सुबह 5 बजे किचेन में बुलाया और बोली , आज से रोज सुबह 5 बजे उठना है , 6 बजे से रसोई में चाय नाश्ता बनाना है, तुम 4रो को 6:30 बजे से पहले सब हो जाना चाहिए, फिर आधे घंटे में पहले घर मर्द नाश्ता करेंगे फिर हम औरते मै भी तुम 4रो के साथ ही नाश्ता करूंगी रोज , फिर 7 से 9 के बीच सुबह का खाना बनाना है, दल चावल सब्जी रोटी चटनी सलाद , ओर रायता रोज , अपने अपने पति का टिफिन पैक करना है , फिर आधा घंटा आराम करना है , फिर एक बहु कपड़े धोएगी, एक बहु बर्तन करेगी एक बहु घर का झाड़ू पोछा, ओर एक बहु बाहर आंगन ओर गार्डन साफ करेगी, रोज अलग अलग बहु अलग अलग काम करेगी बारी बारी से, 11 बजे से पहले पहले, फिर 1 घंटा ओर आराम उसके बाद ठीक 12:30 बजे ऊपर एक कमरा है, वहा पर एक बुक ओर पेन लेकर आना है रोज, मुझे पता है तुम लोग 19 साल की हो और घर की जिम्मेदारी की समझ उतनी होगी नहीं इसीलिए, फिर 4 बजे तक क्लास रहेगी, क्लास के तुरंत बाद शाम की चाय ओर नाश्ता बनाना 5 बजे तक ओर 1 घंटा फिर आराम करना , फिर 1 बहु फिर से घर में झाड़ू पोछा ओर आंगन गार्डन साफ करेगी और बाकी 3 बहु शाम 6 बजे से रात 8 बजे तक खाना बनाएगी, रोज ठीक रात 8:30 को सभी मर्द खाना खाएगे , फिर हम औरते 9 से 9:30 तक , उसके बाद 10 बजे तक बर्तन करके , 10 से 10:30 तक बाहर टहल के आयेंगे फिर सो जायेगे , तुम रूम में जाने के बाद अपने पति के साथ क्या गपशप करोगी उसे मुझे कोई लेना देना नहीं, सुबह 5 बजे उठना मतलब उठना ही है, ओर किसी भी बहु को किसी फंक्शन में अपने घर में जाने की इच्छा हुई तो 1 महीने पहले मुझे आ कर बताना होगा , अगर टाइम पर बताया तो जाने नहीं दूंगी मै, कोई इमरजेंसी रही तो मैं खुद साथ में आऊंगी वक्त पर,
ओर मुझे मम्मीजी बोलना मेरे उनको पपाजी,
अपने पति को नताशा तुम राहुल जी सुनिए,
अपने पति को आशा तुम अनुराग जी सुनिए,
अपने पति को श्रुति तुम गौरव जी सुनिए, ओर तुम
अपने पति को ऋतुजा तुम मयंक जी सुनिए, ऐसे बुलाओगी समझे 4रो , जी मम्मीजी
ओर मैं तुम 4रो को नाम ले कर बुलाऊंगी, ठीक है मम्मीजी, चलो आज के काम निपटा लो और फिर 12:30 ठीक ऊपर क्लास में मिलो , साड़ी पहन के आना 4रो , सोमवार मंगलवार गुरुवार शुक्रवार साड़ी ओर बुधवार शनिवार सफेद सलवार, ओर फिर नताशा सवाल करती मम्मी जी रविवार को , रविवार को तुम 4 रो सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक जहां घूमना है जो करना है वो करोगी , सुबह का खाना सब साथ में करेंगे , रात को सब डिनर करके आयेंगे अपने पति के साथ , सभी अलग अलग जगह जायेगी अपने अपने पति के साथ , ये सुन कर सभी बहुएं बहुत खुश हो गई , ओर हा रोज सुबह अपने पति के पैर छू कर ही बेडरूम से बाहर निकलोगी और फिर हम दोनों के पैर छूने आओगी और सुबह 5:30 के आरती के वक्त पूरा परिवार साथ में रहेगा
ठीक है मम्मीजी, अब 12:30 बजे 4रो बहु ऊपर क्लास में आ गई तो देखती है स्कूल की तरह ऊपर का कमरा था ओर मम्मी जी के टेबल पर स्टिक भी रखी हुई थी, ओर वह मर एक किचेन जैसी जगह भी थी,
नताशा, आशा, श्रुति, ओर ऋतुजा,
1 घंटा है तुम 4रो के पास , वहा किचेन में जाओ और आलू बैंगन मटर फूल कोभी की रसे वाली सब्जी बनाओ, ओर जो जो डालोगी सब्जी में उसे बुक में नोट करना , मै टेस्ट करूंगी और 4 मेंसे एक को अप्रूवल मिलेगा और बाकी 3नो को पनिशमेंट मिलेगी, 1 घंटे में बनी भी चाहिए और अच्छी भी बनी चाहिए,
1 घंटे बाद , नताशा तुम्हारी सब्जी जल गई जाओ दरवाजे के पास जा कर घोड़ी ( मुर्गा ) बनो ऊंची हो के ये सुनते ही नताशा चोक गई लेकिन मम्मीजी के डर से मैं दरवाजे के पास आ कर घोड़ी बन गई,
आशा तुम्हारी सब्जी में नमक ही नहीं है, जाओ नताशा के बाजू में तुम भी बन जाओ घोड़ी,
श्रुति तुम्हारी तो सब्जी ही बननी बाकी है , तुम भी जा कर घोड़ी बनो ओर अब ,
ऋतुजा बहुत डर गई थी घोड़ी बनने के डर से ऊपर से लकड़ी भी थी टेबल पे, ऋतुजा सब्जी में मटर नहीं डाले ऊपर से गैस भी चालू नहीं की तो सब्जी बनेगी कैसे, 4रो की 4रो गधी है , जाओ तुम भी घोड़ी बनो उनके साथ ,फिर मम्मी जी हमारे पास लकड़ी ले कर आइ ओर 4 रो के हिप्स पर लकड़ी से 2 - 2 फटके दिए, एक तो साड़ी पैरों के पास से ऊपर करके कान पकड़ना भी मुश्किल हो रहा था , फिर मम्मीजी एक चेयर लेके ब्लैकबोर्ड के पास बैठी ओर नताशा मतलब मुझे बोला , खड़ी हो जाओ मैं खड़ी हुई और मम्मीजी के पास गई तो मम्मीजी ने मुझे अपने पैरों पर उल्टा लेटाया और हिप्स पर हात से तपड़ मारने लगी जोर जोर से , मै आ आ नहीं मम्मीजी सॉरी आ नहीं आ आ करती रही लेकिन मम्मीजी रुक ही नहीं रही थी, बाकी 3नो घोड़ी बनने के बाद बहुत डर गई थी, फिर जैसे तय 100 तपड़ पूरे हुए तो मम्मीजी ने मेरी साड़ी ऊपर की ओर पेंट निकाल कर ओपन करके मारने लगी फिर तो ओर जोर से तपड़ लग रहे थे , फिर मम्मीजी रुकी और बोली खड़ी हो जाओ मैं रोती सूरत में खड़ी हुई तो फिर मम्मीजी बोली सारी निकालो पेंट भी पूरी न्यूड ओर वही जा कर घोड़ी बन जाओ , एसे ही उन तीनों को 3 बजे तक पनिशमेंट दी और फिर 4रो न्यूड हो कर घोड़ी बनी रही 3:40 तक , जैसे कोई नीचे होती तो मम्मी जी तुरंत एक छड़ी मारती , फिर 3:40 को हम 4रो को खड़ा किया मम्मी जी ने ओर हात पर 6 - 6 स्टिक मार कर बोली साड़ी पहनो, ओर जाओ अपने अपने कमरे में ओर कल यही सब्जी फिर से बनाओगी तैयारी करके आना , ठीक है मम्मीजी अब हम कमरे में आए और इतना दर्द हो रहा था न कि क्या ही बताए , फिर रात को हम 4रो ने अपने पति को बताया , हालांकि हमारी इच्छा नहीं थी लेकिन बताया फिर क्या हम ही गड़े में गिर गए , 4 रो के पति ने 4रो को अलग अलग कमरे में एक ही बात बोली सच में घोड़ी बनी थी , बन के दिखाओ हमने स्कूल में कभी लड़की को घोड़ी बना नहीं देखा, तो पति के खुशी के लिए हम पति के सामने बन गई फिर से ओर पति 2 मिनट 2 मिनट करके आधे घंटे तक बनाया, ओर हम इतनी हॉट भी दिख रही थी तो वो लोग भी कंट्रोल नहीं कर पा रहे थे, 4रो भाई एक जैसे ही थे,
आगे की कहानी अगले हफ्ते तब तक के लिए 10 लाइक और कमेंट शेयर कर दो ये कहानी
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