Secret Experiment Part 2 Ending
नव्या ने शिक्षा मंत्री के कहने पर दसवीं क्लास मे जाना शुरू तो कर दिया था लेकिन वो यही सोच रही थी की ये साल केसे निकलेगा उसकी पुरे साल मे क्या हालत होंगी उसे ज्यादा लिखना पसंद नहीं था इसलिए नोटबुक कम्पलीट करना एक मुश्किल काम था ऊपर से बड़े बड़े प्रश्न उतर सुनाना अलग। 9th क्लास मे कुछ गर्ल्स नव्या को बिलकुल पसंद नहीं करती थी। जब वह कक्षा 10 वीं में गयी, तब उसके साथ एक घटना घटी जब उसे अन्य विद्यार्थी की गलती के लिए दंडित किया गया था. उसकी कक्षा में जाह्नवी नाम की एक लड़की थी जो उसे बिलकुल पसंद नहीं करती थी क्योंकि नव्या सभी लड़कियों मे सबसे ज्यादा हॉट और सेक्सी थी. इसलिए, जान्हवी ने उसे पूरी कक्षा के सामने शर्मिंदा करने की कोशिश की. इसलिए, एक दिन अवकाश के समय जब हम सभी स्कूल के खेल के मैदान में खेल रहे थे, उसने कक्षा शिक्षक का मोबाइल फोन और लैपटॉप चुरा लिया (शिक्षक आमतौर पर स्कूलों में लैपटॉप नहीं लाते हैं, लेकिन वह एक लैपटॉप लेकर आई क्योंकि उसे कुछ महत्वपूर्ण काम करना था और प्रिंसिपल सर ने उसे लाने के लिए कहा था) और इसे नव्या के बैग में छिपा दिया. इसके अलावा उसने नव्या की दो नोटबुक भी छिपा दिया जो उसे उस दिन जमा करनी थी और यह बहुत महत्वपूर्ण था.
इसलिए, अवकाश के बाद, जब शिक्षक उनकी कक्षा में आया, तो उसने चिल्लाया कि उसका लैपटॉप और फोन चोरी हो गया है. तो, बातचीत इस प्रकार थीः:
टीचर – किसने मेरा लैपटॉप और मोबाइल चुराया!
कोई जवाब नहीं मिला
वो - मैं फिर पूछ रही हूँ ऐसा किसने किया! जिसने भी किया वह बड़ी मुसीबत में पड़ेगा.
कुछ समय बाद,
ठीक है, ठीक है मुझे मत बताओ. नव्या! बेटा सभी के बैग की जांच करें.
नव्या - ओके मैम
कुछ मिनटों के बाद,
नव्या - मैम किसी के बेग मे नहीं है
तभी जाह्नवी ने टोका
जाह्नवीः मैम लेकिन नव्या ने अपने बैग की जाँच नहीं की.
नव्या – मै क्यों चुरा लूँगी ? लेकिन अगर आप जांच करना चाहते हैं, तो तुम खुद मेरे बेग की तलाशी ले सकती हो
वह मेरी सीट पर गई, मेरा बैग खोला और अगली बात ने मुझे अंदर तक झकझोर दिया.
नव्या - मुझे नहीं पता कि यह मेरे बेग मे कहा से आया . प्लीज मेरा यकीन करो मैम.
मेम : फिर क्या ये खुद से यहां आ गए ! मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि आप ऐसा कर सकती हैं. अब तुम्हें सजा मिलेगी.
मैंने विनती की लेकिन मेम ने मेरी एक नहीं सुनी . मैंने जाह्नवी को मुस्कुराते हुए देखा और तभी मुझे समझ में आया कि इन सबके पीछे वो ही थी. मेडम मुझे प्रिंसिपल के ऑफिस तक कान से खींचकर ले गई. मुझे बहुत दर्द हो रहा था पर उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। वहा पहुंचकर मैडम ने सारी घटना प्रिंसिपल को बता दी। प्रिंसिपल सर ने मुझे ऐसे देखा जैसे वो मेरी खाल उतारेंगे।
प्रिंसिपल – हा क्या चल रहा है ये एक तो तुम बिलकुल पढ़ती नहीं हो ऊपर से चोरी भी करने लगी हो।
नव्या – नहीं सर मेने कुछ नहीं किया ये सब जान्हवी का करा धरा है आप चाहे तो सी सी टी वी देख लो आपको पता चल जायेगा।
प्रिंसिपल ( गुस्से मे ) – पहली बात यहां कोई सीसीटीवी नहीं है और तुम पहले गलती कर रही हो ऊपर से उस गलती को किसी और पर डाल रही हो इसके लिए तुम्हे डबल सजा मिलेगी।
नव्या हैरान थी उसे उस गलती की सजा मिलने जा रही थी जो उसने की ही नहीं पर वो कुछ साबित नहीं कर सकती थी
प्रिंसिपल – सबसे पहले इसे मैन गेट पर ले जाओ और गेट के साथ लगकर मुर्गा बना दो डेढ़ घंटे के बाद इसे और डेढ़ घंटे के लिए कड़कती धूप में स्कूल के खेल के मैदान में मुर्गा मुर्गा बना दो और उसके बाद कान पकड़कर 200 सिट अप करने के लिए कहो और इसके माता-पिता को फोन करो और इसकी करतूतों के बारे मे बताओ. लेकिन सबसे पहले इसे असेंबली मंच पर चलो वहा तुम्हारे चुत्तड़ लाल किये जायेंगे ताकि सारे स्कूल को पता चले की यहां गलती की क्या सजा मिलती है।
नव्या – सर मुझे माफ़ करदो आगे से ऐसा कुछ नहीं होगा मेरा यकीन करो सर मेने ऐसा कुछ नहीं किया।
प्रिंसिपल ( गुस्से मे लाल होते हुए ) जाकर स्टेज पर मुर्गा बन जाओ अभी समझ गयी
नव्या असेंबली स्टेज पर जाकर मुर्गा बन जाती है बुधवार का दिन था। इसलिए उसने आज व्हाइट यूनिफॉर्म जिसमें व्हाइट सूट और व्हाइट सलवार पहनी हुई थी। साथ में व्हाइट दुपट्टा जिसे उसने कमर के पीछे बंधा हुआ था। और दुपट्टे का आगे का हिस्सा उसके चेहरे के आगे लटक रहा था। पिछला पूरा साल स्कूल में रहने के कारण नव्या यहां के माहौल को अच्छी तरीके से समझ चुकी थी वह सभी अध्यापकों के नेचर से अच्छे से वाकिफ थी। इसलिए उसने मुर्गा बनते ही अपने आप को मेंटली स्ट्रांग कर दिया। उसे पता था कभी भी प्रिंसिपल की छड़ीयों की बरसात उसके चूतड़ों पर हो सकती है। उसे दो बातें अच्छे से पता थी। की प्रिंसिपल सर को मुर्गी के कान छूटना। और चूतड़ नीचे आना। बिल्कुल पसंद नहीं था। इसलिए उसने पहले ही अपने चूतड़ अच्छे से ऊंचे कर लिए और कानों को अंगूठे के साथ कसकर पकड़ लिया। अब बस छड़ी के पढ़ने का इंतजार था। नव्या का दिल जोरो से धड़क रहा था। कैसा डंडा होगा कितनी पड़ेगी? क्योंकि प्रिंसिपल सर कभी भी गिन कर नहीं मारते? नव्या इन सब मे खोई हुयी थी की तभी एक जोरदार डंडा नव्या के चूतड़ों पर लगता है डंडा इतना जोरदार था साथ ही अचानक लगने से नव्या के पैर लड़खड़ा जाते है पर नव्या बिना कान छोड़े अपने आप को संभालती है तभी दूसरा डंडा चूतड़ों पर पड़ता है। इसी तरह एक के बाद एक जोरदार डंडे नव्या के चूतड़ों पर बजना शुरू हो जाते है
एक-एक डंडा इतना जोरदार था कि नव्या से उसका दर्द बिल्कुल सहन नहीं हो रहा था। नव्या बुरी तरह रोए जा रही थी। पर डंडे रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। लगभग 15 डंडे पडने के बाद नव्या दोनों चूतड दबाकर खड़ी हो जाती है। भयंकर दर्द हो रहा था। दर्द के मारे नव्या कभी अपने चूतड़ों को मसल रही थी तो कभी चूतड़ों की दरार में हाथ फेर रही थी। प्रिंसिपल को यह सब देखकर बहुत आनंद आ रहा था।
“आई'एम सॉरी सर आई नो आई डु बिग मिस्टेक प्लीज फॉरगिव मी आई नेवर डू अगेन, “ रोते हुए नव्या ने बोला।
रुक जा छोरी अभी अंग्रेजी के तेरी उर्दू पंजाबी गुजराती सारी भाषा निकलेगी। चाल मुर्गा बन और चूतड़ उच्चे कर। गुस्से से प्रिंसिपल ने नव्या को देखकर बोला।
नव्या चुपचाप थोड़ा पीछे आकर मुर्गा बन जाती है। प्रिंसिपल डंडे को उसके चूतड़ों पर सहलाता है और फिर खींच कर मारता है। 15 डंडे खाने के बाद अब डंडों की मार और भी ज्यादा दर्द से भरी हुई थी। नव्या को खींच खींच कर एक के बाद एक डंडे लगना शुरू हो जाते हैं। वह बुरी तरह रो रही थी लेकिन प्रिंसिपल सर को कोई फर्क नहीं पड़ता था। लगातार 10 डंडे खाने के बाद नव्या फिर से एक बार खड़ी हो जाती है। नव्या के दोनों हाथ उसके चूतड़ों पर थे। आंखों से गंगा जमुना बह रही थी। रोते हुए नव्या प्रिंसिपल सर को कह रही थी। सर इस बार माफ कर दो आगे से कभी कोई गलती नहीं होगी मैं आपके आगे हाथ जोड़ती हूं। कहोगे तो पैर भी पकड़ लुंगी बहुत दर्द हो रहा है सर।
प्रिंसिपल सर उसको गौर से देखते हैं। अच्छा पैर पकड़ेगी। चल मेरे सामने आकर खड़ी हो और अपने घुटनों पर बैठ जा। नव्या वैसा ही करती है और प्रिंसिपल सर के सामने जाकर घुटनों पर बैठ जाती है। अब नीचे झुक जाओ और मेरे दोनों पैर पड़कर जमीन पर अपनी नाक रगड़ो।
नव्या ने ठीक वैसा ही किया प्रिंसिपल सर के दोनों पैरों को पड़कर जमीन पर नाक रगड़ना शुरू कर दिया। उसे लगा था कि ऐसा करने से कम से कम उसे डंडे पडना तो बंद हो जाएंगे। लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं था।
तभी प्रिंसिपल सर बोलते हैं अपने चूतड़ों को थोड़ा ऊपर कर लो। और ढंग से नाक रगड़ो और माफी मांगो।
नव्या को कुछ समझ नहीं आ रहा था उसने अपने चूतड ऊपर कर लिए और नाक रगड़ना जारी रखा।
अचानक से एक जोरदार डंडा उसके उठे हुए चूतड़ों पर आकर लगता है। ठंडा पडते ही नव्या समझ चुकी थी कि अभी भी उसकी पिटाई जारी रहेगी। फिर एक के बाद एक डंडे पढ़ना शुरू हो जाते हैं। पैर पड़कर माफी मांगेगी पैर पकड़ने से क्या तू बच जाएगी? आज तेरे चूतड़ ऐसे लाल करूंगा कि गलती करने से पहले तू 10 बार सोचेगी।
नव्या मन मे सोच रही थी की इससे अच्छा तो वह चुप करके मुर्गा बने रहती तो इतनी शर्मिंदगी नहीं झेलनी पडती।
लगातार 12 डंडे नव्या के उठे हुए चूतड़ों पर मारने के बाद प्रिंसिपल ने नव्या को खड़ा किया। नव्या की हालत बहुत टाइट थी ऐसा लग रहा था जैसे उसके चूतड़ों पर से एक-एक इंच खाल उतर गई है। वह अच्छे से अपने चूतड़ों को मसल रही थी।
तभी प्रिंसिपल गुस्से में, “यह ड्रामा करना बंद कर और सीधी खड़ी हो जा। अच्छे से कान पकड़ो और यहीं पर 200 तक उठक बैठक लगाओ”। नव्या अपने दोनों कान पकड़ती है और उठक बैठक लगाना शुरू करती है।
प्रिंसिपल एक महिला चपरासी को स्टेज पर बुलाते हैं उसके हाथ में डंडा देकर उसे बोलते हैं कि ध्यान रखो कि यह ठीक से उठक बैठक लगाएं अगर कहीं भी लापरवाही दिखे तो उसके चूतड़ों पर बिना सोचे समझे खींच कर लगा देना।
नव्या उठक बैठक लगाना शुरू कर देती है और वह चपरासी नव्या के पीछे डंडा तान कर खड़ी हो जाती है।
लगभग 50 उठक बैठक लगने के बाद नव्या के चूतड़ों पर एक जोरदार डंडा पड़ता है। नव्या ने सोचा शायद वह प्रॉपर नहीं बैठी होगी। तभी अगले 10 उठक बैठक के बाद एक और डंडा पड़ता है। नव्या को फिर से वही लगा। अगले 10 के बाद डंडा फिर पड़ता है और अगले 10 के बाद फिर से। सिलसिला यहीं खत्म नहीं होता अगले 10 उठक बैठक के पास एक जोरदार डंडा उसके चूतड़ों पर पड़ता है और उसके अगले 10 के बाद एक और पड़ता है।
नव्या ठीक से उठक बैठक लग रही थी लेकिन फिर भी उसे डंडे पड रहे थे जिससे उसे गुस्सा आ जाता है और मैं गुस्से में चिल्लाती है। यह क्या कर रही हो तुम तुम्हें दिख रहा है ना कि मैं ठीक से लगा रही हूं फिर भी तुम मारे जा रही हो तुम्हें बोला गया था ना प्रॉपर न करने पर मारना?
चपरासियों को स्कूल में काफी छूट मिली हुई थी। वह स्टूडेंट के साथ एक टीचर जैसा पेश आते थे। नव्या के तेज चिल्लाने के साथ ही उसके चूतड़ों पर एक के बाद एक डंडे पडना शुरू हो जाते हैं। यहां की स्टूडेंट है तू इससे ज्यादा कुछ नहीं। और यहां के स्टूडेंट केवल अपने चूतड़ लाल करवाते हैं। बीच में नहीं बोलते समझी। चल 100 और बची हुई है ठीक से लगा और कान क्रिस क्रॉस पकड़।
नव्या अपने दाएं हाथ से बाय कान को और बाएं हाथ से दाएं कान को पड़ती है। और उठक बैठक लगना शुरू कर देती है। पहले की ही तरह उसे हर 10 उठक बैठक के बाद कभी एक डंडा तो कभी दो डंडे पड़ रहे थे। नव्या दर्द से तड़प रही थी।वो मन ही मन सोच रही थी की एक बार ये क्लास पूरी हो जाये फिर इस चपरासी को जॉब से निकलवा दूंगी।
पूरे 200 उठक बैठक लगाने के बाद नव्या के पैर उसे जवाब दे चुके थे। अब नव्या को लग रहा था कि जैसे वह 1 मिनट के लिए भी खड़ी नहीं रह सकती। वह काफी थक चुकी थी। और ऊपर से इतने डंडे पड़े थे कि उसके चूतड बुरी तरह दर्द कर रहे थे। अभी वह कुछ सोच ही रही थी कि अचानक से उसके चूतड़ पर एक डंडा पड़ता है। खड़ी क्यों है मेंन गेट पर चलकर मुर्गा बन? चपरासी ने उससे कहा।
नव्या के पास कोई विकल्प नहीं था वह चुपचाप वहां से चलती है और स्कूल के मेंन गेट पर पहुंच जाती है। नव्या वहां पहुंचकर एक दीवार के साथ में मुर्गा बन जाती है। 9th क्लास में वह कभी लेट नहीं हुई थी और ना ही उसे कभी मेंन गेट पर जाकर पनिशमेंट लेनी पड़ी थी। इसलिए आज पहली बार था कि उसे अपनी पूरी लाइफ में ऐसे स्कूल के गेट पर मुर्गा बनना पड़ रहा था।
तभी वहां पर पीटीआई सर आते हैं और वह नव्या को देखकर बोलते हैं। क्या हो रहा है यह पहली बार गेट पर आई हो क्या?
नव्या यस सर में जवाब देती है।
ओके गेट पर ऐसे नहीं बनते खड़ी हो जाओ।
नव्या बिना देरी के खड़ी हो जाती है।
गेट की तरफ बैक करके खड़ी हो टांगे अच्छे से ओपन करो और फिर मुर्गा बनो।
नव्या वैसा ही करती है वह गेट की तरफ बैक करके खड़ी हो जाती है अपनी दोनों टांगों को अच्छे से खोलती है और नीचे झुक कर मुर्गा बन जाती है।
गुड गर्ल टांगें थोड़ी और खोलो।
यस सर नव्या अपनी टांगें और खोल देती है। अब सर को थोड़ा नीचे झुकाओ और चेहरे को दोनों टांगों के बीच में ऐसे रखो कि गेट के बाहर से लोगों को तुम्हारा चेहरा दिखे।
नव्या ने ठीक वैसा ही किया गेट की सलाखें इतनी चौड़ी थी कि बाहर के लोगों को नव्या का चेहरा साफ नजर आ रहा था और नव्या शर्म के मारे जमीन में गाड़ी जा रही थी।
कौन सी क्लास में हो पीटीआई सर पूछते हैं?
सर 10th क्लास में नव्या ने रिप्लाई किया।
फिर तो साल में काफी बार यहां पर आना पड़ेगा सो सीख जाओ गेट पर बिल्कुल ऐसे ही बनना है तुम्हें। और नव्या के चूतड़ों पर दो जोरदार डंडे लगते हैं। ऐसे ही चूतड़ ऊंचे रखना चेहरा बाहर वालों को दिखाते रहना चाहिए। ऐसा कहकर पीटीआई सर वहां से चले जाते हैं।
नव्या मन ही मन सोच रही थी कि कहां फंस गई अगर शुरुआत में ही यही हाल है तो साल खत्म होते-होते तो यह सब मेरी मार लेंगे?
पूरा डेढ़ घंटा मुर्गा बनने के बाद पीटीआई सर वहां आते हैं और उसे एक डंडा मार कर खड़ा करते हैं। नव्या चुपचाप खड़ी हो जाती है।
कुछ शर्म आ रही है नालायक यही सब करने आते हो स्कूल में।
नव्या पीटीआई सर की तरफ बिना नजर झुकाए देखती है और कहती है सर मैंने कुछ नहीं किया मेरी कोई गलती नहीं थी।
पिटीआई, “आंख और दिखा रही है मतलब शर्म नाम की कोई चीज नहीं है पीछे घूम और हाथ आगे करके गेट को पकड़ ले।”
नव्या को मालूम था आज उसका दिन ही खराब है इसलिए वह चुपचाप घूम गयी और गेट की सलाखो को पकड़ लिया
“टांगे पीछे करो और चूतड़ों को बाहर की तरफ निकालो” पिटीआई ने आर्डर दिया
नव्या ने अपने पैर पीछे किये और चूतड़ों को थोड़ा पीछे करके अच्छे से परोस दिया
अब जोरदार डंडे पड़ने शुरू होते है नव्या गेट को टाइट पकड़ लेती है और सर नीचे करके जोर जोर से रोने लगती है
लगातार 7 डंडे मारने के बाद पिटीआई उसे खड़ा करते है और गुस्से मे बोलते है “ जाकर ग्राउंड के बीच मे धूप मे मुर्गा बन जाओ अगर अपनी खैर चाहती है तो”
“यस सर ” नव्या रिप्लाई करती है और वहा से ग्राउंड के बीच मे जाकर कड़कती धूप मे मुर्गा बन जाती है।
नव्या ग्राउंड के बीचो-बीच मुर्गा बनी हुई थी और वहां हर 15 मिनट के बाद उसे अपने चूतड़ ऊपर नीचे करने के कारण डंडे पड़ रहे थे। और गेम्स पीरियड में आई हुई कुछ छोटी क्लासेस की लड़कियां इस नजारे का लुफ्त उठा रही थी। नव्या को बहुत शर्मिंदगी महसूस हो रही थी। इसी बीच एक बार एक 6th क्लास की लड़की ने उसे आकर कहा कि मैडम ने बोला है अपने चूतड़ ढंग से ऊंचे कर लो नहीं तो तुमसे ग्राउंड का चक्कर लगवाएगी ऐसे ही मुर्गा बनाकर। नव्या शर्म के मारे जमीन में धस गई और चुपचाप अपने चूतड़ हवा में उठा लिये। डेढ़ घंटा वहां मुर्गा बनाने के बाद उसे खड़ा किया गया और प्रिंसिपल ऑफिस में भेजा गया।
मे आई कम इन सर नव्या ने परमिशन मांगी।
यस यस कम इन। आ गई अकल ठिकाने। आइंदा ऐसी गलती नहीं होनी चाहिए। और कल अपने पेरेंट्स को बुला कर ले आना। प्रिंसिपल ने आर्डर दिया।
आई एम सॉरी सर आगे से आसान नहीं होगा प्लीज मेरे पेरेंट्स को मत बुलाए प्लीज सर।
नहीं नहीं तुम्हारे पेरेंट्स को तुम्हारी करतूत पता होनी चाहिए और एक बार जब तक तुम्हारे चूतड़ उनके सामने लाल नहीं किए जाएंगे तब तक तुम्हें ठीक से अकल नहीं आई। अभी क्लास में जाओ और कल उनको बुला कर लेकर आना।
नव्या चुपचाप अपनी क्लास में आ जाती है और कुछ देर बाद छुट्टी हो जाती है उसके बाद मैं अपने फ्लैट पर जाकर रिपोर्ट लिखना शुरू कर देती है। सरकारी विद्यालयों में सीसीटीवी की सुविधा होनी चाहिए क्योंकि बिना सीसीटीवी के कभी-कभी विद्यार्थियों को उसे गलती की सजा मिल जाती है जो उन्होंने नहीं की और? यह सब उन्हें कोई गलत कदम उठाने पर मजबूर कर सकती है। इसलिए मैं सरकार से दरखास्त करुंगी कि वह सभी विद्यालयों में सीसीटीवी लगवाएं। पनिशमेंट के कारण नव्या काफी थक चुकी थी जिसके कारण वह वहीं पर बिना कुछ खाए पिए सो जाती है। और सीधे सुबह उठती है। सुबह उठकर जब वह अपनी यूनिफॉर्म प्रेस कर रही थी तभी उसे याद आता है कि आज तो उसे अपने पेरेंट्स को साथ लेकर स्कूल में जाना है। वह इस बारे में किसी को बता नहीं सकती थी इसलिए सोच में पड़ जाती है कि आखिर उसे आज करना क्या है? इस सब को सीक्रेट रखना चाहती थी लेकिन उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह करें क्या? तभी नव्या को अपनी एक बेस्ट फ्रेंड नताशा का ख्याल आता है जो उससे कुछ किलोमीटर दूर रहती थी। बहुत सोच विचार करने के बाद नव्या उसे कॉल करती है और अपने फ्लैट पर तुरंत पहुंचने के लिए बोलती है। उधर नताशा नव्या की बात को टाल नहीं सकती थी इसलिए वह अपनी स्कूटी उठाती है और सीधे नव्या के फ्लैट पर पहुंच जाती है। नताशा फ्लैट की डोरबेल बजाती है। गेट खुलता है और नताशा देखती है कि नव्या एक गवर्नमेंट स्कूल की स्कूल गर्ल की यूनिफॉर्म में खड़ी है। नताशा को काफी अजीब लगता है और उससे रहा नहीं जाता। और वह नव्या से बहुत सारे क्वेश्चन करना शुरू कर देती है नताशा को इतने क्वेश्चन करते देख नव्या उसे रोकती है। रुक जा सांस ले ले पहले एक काम कर अंदर जा और मेरी अलमारी में कुछ साड़ियां रखी है उनमें से एक साड़ी डाल दे हम स्कूल के लिए लेट हो रहे हैं। मैं तुझे सब डिटेल से बताती हूं। नताशा रेडी होने लगती है और नव्या उसे सारी बातें शुरू से बताती है।
तो तू पिछले 1 साल से यहां पर स्टूडेंट बनकर रह रही है नताशा ने पूछा।
हां और अभी 1 साल और निकालना है तब जाकर मेरा सारा काम पूरा होगा।
तो आज तूने मुझे क्यों बुलाया और हम स्कूल क्यों जा रहे हैं?
नव्या नताशा को पिछले दिन की सारी बातें बताती है और कहती है। तुझे मेरी गार्जियन बनकर चलना है और वहां इतना कहना है कि तू मेरी बड़ी बहन है और पेरेंट्स स्कूल में नहीं आ सकते।
तुझे कल इतना मारा और तूने बर्दाश्त कर लिया कुछ बोला भी नहीं।
बोलेंगे सारा हिसाब करेंगे परंतु साल खत्म होने के बाद। अभी तू जल्दी से रेडी हो जा वरना हम लेट हो जाएंगे और वहां पर लेट कमर्स को मेन गेट पर मुर्गा बना देते है।
नताशा और नव्या वहां से स्कूल के लिए निकल जाते हैं स्कूल में एंट्री करते ही नव्या को बताया जाता है कि उसे सबसे पहले प्रिंसिपल रूम में ही जाना है।
मे आई कम इन सर।
यस कम इन।
सर आपने मेरे गार्जियन को बुलाया था यह मेरी बड़ी बहन नताशा है।
आपके मां-बाप नहीं आए। प्रिंसिपल नताशा से पूछते है
नताशा रिप्लाई करती है सर मम्मी पापा दोनों जॉब करते हैं इसलिए वह यहां नहीं आ पाए और मुझे भेजा है।
चलो ठीक है वैसे तो हमें मम्मी पापा को ही बुलाना था पर कोई नहीं आप आए हो तो आपको बताते हैं। कल गेम्स के पीरियड के दौरान इसकी क्लास के टीचर का मोबाइल और लैपटॉप चोरी हो गया था जो उसके बैग में पाया गया है। ऐसी हरकतें यहां पर बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करी जा सकती। अब आप बताओ क्या करना चाहिए क्या मैं इसे स्कूल से निकाल दूं?
नव्या पहले ही नताशा को समझाकर लाई थी की प्रिंसिपल से किसी भी तरह की जिद बहस मत करना वह जैसा बोलते हैं उसमें उनका साथ देना। वरना बात और ज्यादा बिगड़ जाएगी ।
देखो सर वैसे तो यह बहुत गलत बात है पर आप इसको स्कूल से मत निकालिए।
ऐसे तो स्कूल का माहौल बहुत ज्यादा बिगड़ जाएगा मैडम।
हां जी सर पर आप उसको लास्ट चांस दे दीजिए और वॉर्निंग देकर छोड़ दीजिए। मैं वादा करती हूं आगे से ऐसा नहीं होगा।
प्रिंसिपल कुछ देर सोचने के बाद बाहर से चपरासी को आवाज लगाने के लिए बेल बजाते है।
मे आई कम इन सर, सर आपने बुलाया।
हां ममता एक काम करो बाहर पेड़ से एक अच्छा ताजा मोटा सा डंडा तोड़ कर ले आओ कम से कम आधा इंच मोटा हो। और इससे पहले एक काम करो उधर टेबल से दो-तीन मोटी – मोटी बुक्स उठाकर इसके चूतड़ों पर रख दो। प्रिंसिपल नव्या की तरफ देखते हुए हां लड़की मुर्गा बन जा और अपने चूतड अच्छे से ऊपर कर ले। नव्या चुपचाप से उच्ची होकर मुर्गा बन जाती है। उधर से चपरासी 2 - 3 मोटी – मोटी किताबें उठाकर नव्या के चूतड़ों के ऊपर रख देती है।
यह सब देखकर नताशा को हैरानी हो रही थी कि नव्या उसके सामने इस हालत मे मुर्गा बनी हुई है। कुछ 15 मिनट बीत जाने के बाद प्रिंसिपल अपनी चेयर से खड़े होते है और बाहर राउंड के लिए जाने लगते है तभी ममता एक नीम का मोटा डंडा लेकर प्रवेश करती है प्रिंसिपल उसे डंडे को टेबल पर रखने के लिए बोलते है और बाहर निकल जाते है। अब रूम मे केवल नताशा थी और उसके सामने मुर्गा बनी हुयी नव्या।
“ये क्या है इतना वेट रख रखा है ऊपर और कितनी देर बनाएंगे और ये डंडा कितना मोटा है इससे क्या करेंगे” नताशा हैरानी से नव्या से पूछती है
मुझे कुछ नहीं पता की कितनी देर के लिए बनाएंगे ये सब तो प्रिंसिपल जाने और हां डंडे से पिटाई होगी मेरी, नव्या ने उत्तर दिया
पिटाई इस डंडे से हाथ की हड्डिया क्रेक हो जाएगी ज्यादा तेज़ मार दिया तो समझी
समझ गयी समझ गयी पर यहां हाथ पर नहीं मारते, चूतड़ों पर पड़ेगा ये मोटा डंडा
“ठीक है पर तू इतनी देर से ये बुक को संभालेहुए है वो भी बिना गिराए कैसे, दर्द नही हो रहा तुझे” नताशा हैरानी से पूछती है
बहुत हो रहा है पर आदत हो गयी पिछले साल से ऐसे बन बनकर, वैसे भी बुक गिरते ही डंडे पड़ते है पिछवाड़े पर जोर जोर से सो इस दर्द से ज्यादा दर्द डंडो से होता है इसलिए बुक डर के कारण नहीं गिरती, नव्या ने डिटेल मे रिप्लाई किया
अब प्रिंसिपल की एंटरी होती है और दोनों चुप हो जाते है प्रिंसिपल एक एक करके तीनो बुक को नव्या के चूतड़ों के ऊपर से हटकर साइड में टेबल पर रख देते हैं। अब वह टेबल पर रखे डंडे को उठाते हैं और नव्या के चूतड़ पर रखकर उसे ऊंचा होने के लिए बोलते हैं। जैसे ही नव्या अच्छे से ऊपर हो जाती हैं वैसे ही उसके चूतड पर जोर से डंडा बजता है डंडे का साउंड काफ़ी तेज़ था जिसे देखकर नताशा एकदम सहम जाती है नव्या जोर से चीखती है तभी दूसरा डंडा पड़ता है मुँह बंद रख हरामखोर प्रिंसिपल गुस्से मे बोलते है
सर बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है
यह सब गलती करने से पहले सोचना चाहिए था।और तीसरा डंडा पड़ता है लगभग 5 डंडे मारने के बाद प्रिंसिपल डंडे को नताशा की तरफ करते है और कहते है आप इसकी बड़ी बहन है तो इसको सुधारने का आपका भी हक है। इसलिए यह डंडा लिजिए और अच्छे से इसके चूतड़ लाल करिए।
नताशा हैरानी से देखती है नहीं सर आप ही मारिए।
नहीं नहीं प्लीज खड़े होइए और यह डंडा लिजिए चार-पांच इसको लगाइए।
नताशा अपनी जगह से उठती है डंडा हाथ में लेती है और नव्या के पीछे जाकर खड़ी हो जाती है। प्रिंसिपल सर जाकर अपनी चेयर पर बैठ जाते हैं।
नताशा को चुपचाप खड़ा देखकर नव्या, - क्या सोच रही है लगा दे जब इतने पड रहे हैं तो 2 - 4 तेरे भी सही?
पता नहीं क्या-क्या करवाएगी मुझसे ऐसा बोल कर नताशा नव्या को एक डंडा लगाती है?
डंडा ज्यादा तेज नहीं था जिसे देखकर प्रिंसिपल सर नताशा को बोलते हैं मैडम डंडा लगा रही हो या अपना प्यार दिखा रही हो।
नताशा फिर से एक डंडा लगाती है।
मैडम अच्छे से मारो।
नताशा एक और डंडा लगाती है।
डंडे धीरे रखना देख प्रिंसिपल सर अब वहां से खड़े होते हैं। नव्या के पास आते हैं नताशा से डंडा लेकर नव्या के चूतड़ों पर खिंच खिंच कर डंडे मारना शुरू करते हैं। ये डंडे पहले पांच डंडों से भी ज्यादा दर्द से भरे थे जिसके कारण नव्या जोर-जोर से रोना शुरू कर देती है। 5 डंडे मारने के बाद प्रिंसिपल नताशा को डंडा पकड़ाते हैं और बोलते हैं ऐसे मारते हैं और अब आप मारो। अगर आप इतना ही तेज लगाते हो तो मैं इसको छोड़ दूंगा। वरना हर बार मुझे आपको बताना पड़ेगा की डंडे कैसे मारते हैं? नताशा डंडा लेकर खड़ी हो जाती है।
नताशा को खड़ा देख नव्या रोते हुए नताशा से बोलती है - प्लीज खींच खींच कर मारना नहीं तो है ना प्रिंसिपल सर मेरी खाल उतार देंगे।
नताशा को ना चाहते हुए भी अपनी फ्रेंड के चूतड़ों पर पूरे ताकत के साथ डंडे मारने पड़ रहे थे।
लगभग 8 डंडों के बाद प्रिंसिपल नताशा को रुकने के लिए बोलते हैं और नव्या को खड़ा करते हैं और उसे उसकी क्लास में भेज दिया जाता है यह दिन भी नव्या के लिए काफी शर्मनाक था। आज उसे अपनी ही फ्रेंड से अपने चूतड़ लाल करवाने पड़े थे।
दसवीं क्लास की शुरुआत नव्या के लिए काफी दर्दनाक थी। लेकिन यहां केवल शुरुआत थी। पूरी साल नव्या के साथ बहुत कुछ होता है। वह कई कई घंटे मुर्गा बनकर रहती है। ज्यादातर पीरियड में उसे मुर्गा बनाकर याद करवाया जाता है। एक बार महीने में 6 छुट्टियां होने के कारण उसे ग्राउंड के लगभग छह चक्कर मुर्गा बनकर लगाने पड़े थे। वह नौवीं क्लास में कभी लेट नहीं हुई थी जिसके कारण उसे गेट पर मुर्गा नहीं बनना पड़ा था लेकिन दसवीं क्लास में लेट ना होते हुए भी उसे कई बार कई टीचरों से पनिशमेंट के कारण गेट के ऊपर जाकर मुर्गा बनना पड़ा था। एक बार बिना यूनिफार्म स्कूल में आने के कारण उसे लगभग 2 घंटे अपनी जींस में मुर्गा बनना पड़ा था और जींस के कारण उसे पड़ने वाले डंडों की संख्या भी बहुत ज्यादा थी। 50 से 100 उठक बैठक बिल्कुल नॉर्मल थी लेकिन दो बार उसे यूनिट टेस्ट में फेल होने के कारण लगभग ढाई सौ उठक बैठक लगानी पड़ी थी। उसकी पूरे साल ऐसी हालत थी कि मोस्टली उसे अपने फ्लैट पर आकर बेड पर उल्टा होकर सोना पड़ता था। उसे इंतजार था तो बस फाइनल एग्जाम का और आखिर वह दिन आ गए जब नव्या अपने फाइनल एग्जाम देने के लिए केंद्र पर गई। वहां जाकर उसने देखा कि जहां तो कोई भी लड़की किसी तरह की नकल नहीं कर रही है और ना ही कहीं बाहर से नकल हो रही है लेकिन नव्या को बिल्कुल भी अजीब नहीं लगा था पूरे साल पिट-पिट कर सबको शायद सब कुछ याद हो गया था। यहां तक की नव्या के हाथ खुद एग्जाम में अपने आप चल रहे थे। सारी लड़कियां अपने स्कूल से अपने केंद्र पर जाती थी। इसलिए जब आखिरी एग्जाम था तो प्रिंसिपल ने उन्हें संबोधित किया।
प्रिंसिपल - प्यारे विद्यार्थियों आज आपका आखरी एग्जाम है अच्छे से एग्जाम करना। आप लोगों को पूरा साल यहां तरह-तरह की सजाई दी गई बहुत मारा गया लेकिन मैं आपको आश्वासन देता हूं यह सब आपकी भलाई के लिए था। आप अच्छे मार्क्स से उत्तरायण हो जाओ आप स्कूल का नाम रोशन करो यही मेरी इच्छा है। साथ में एक वार्निंग भी है। जो भी लड़की एक भी एग्जाम में फेल होती है तो उसे रिजल्ट आने की बाद स्कूल में उपस्थित होना पड़ेगा। उसे दिन उसे पेपर में फेल होने की सजा दी जाएगी।
यस सर सब चिल्ला कर जोश में बोलते हैं।
गुड गर्ल्स बेस्ट ऑफ़ लक फॉर योर एग्जाम्स।
रिजल्ट डे - आज दसवीं क्लास का रिजल्ट आता है नव्या सारी लड़कियों के रिजल्ट को चेक करती है और वह बिल्कुल हैरान हो जाती है। सब लड़कियां सारे एग्जाम में पास थी और सबके मार्क्स 85% से ऊपर थे। यहां तक की स्टेट टॉपर और जिला टॉपर भी उसी के इस स्कूल से थी। जिसमें 6 लड़कियां टॉप 10 मे भी थी। उसके बाद नव्या अपना रिजल्ट चेक करती है। और हैरान हो जाती है कि वह तीन एग्जाम में फेल थी। इंग्लिश हिंदी और सोशल स्टडी।
अपनी रिपोर्ट लिखती है और अगले दिन मिनिस्टर के सामने रिपोर्ट पेश करती हैं।
शिक्षा मंत्री - हां तो मिस नव्या क्या देखा आपने इस पूरे साल में उस स्कूल में?
नव्या - सर स्कूल अपनी जगह पर बिल्कुल सही है। थोड़ी बहुत सजा वहां पर मिलती है। लेकिन उन सजाओ के कारण वहा का रिजल्ट भी आता है मुझे लगता है कि हमें ऐसे ही और स्कूलों की जरूरत है और उधर स्कूल में उन्हीं के जैसा डिसिप्लिन होना चाहिए तो मेरी यही सलाह है सर हम उसे स्कूल को आगे ऐसे ही चलने दे और उसमें किसी तरीके का कोई हस्तक्षेप ना करें।
शिक्षा मंत्री - ओके मिस नव्या मैं स्कूल को कंटिन्यू करता हूं और आपसे अनुग्रह करता हूं कि आप जाकर अपनी जॉब ज्वाइन कर ले।
नव्या - यस सर और थैंक यू सर।
अगले दिन नव्या जॉब पर जाती है और वहां रिजाइन करके अपने घर चली आती है। घर पर सब हैरान थे कि आखिर उसने जॉब से रिजाइन क्यों किया? काफी पूछने के बाद नव्या उन्हें पिछले दो सालों की सारी हिस्ट्री बताती है।
पेरेंट्स - बेटा अब आगे क्या करोगी?
नव्या - कुछ नहीं सोचा मम्मी पापा। लेकिन मुझे इस साल अपनी दसवीं उस स्कूल से पूरी करनी है लेकिन इस बार फेक तरीके से नहीं बल्कि रियल में। अगर इस बार वहां पर मेरे पेरेंट्स को बुलाया जाता है तो आप लोग वहा चलोगे ना कि मुझे किसी और को लेकर जाना पड़े। बस एक साल मुझे अपने मन की कर लेने दो। प्लीज उसके बाद आप जो बोलोगे वह मैं करूंगी।
ओके बेटा यूनिफॉर्म नहीं ले लो शायद छोटी हो गई होगी और बेस्ट ऑफ लक फॉर योर 10th क्लास।
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