मीरा को बनाया गया मुर्गा - Hindi Murga Punishment Stories
मेरा नाम मीरा है। मैं 22 साल की हूँ। गोरापन, लंबी हाइट और भरा-भरा बदन किसी कायामत से कम नहीं है। जो भी एक बार मुझे देख लेता है वो मुझे पाने की दुआ माँगने लगता है। इतनी खूबसूरत होने के बावजूद मैं आज भी सिंगल हूँ। मुंबई में मेरे दो बड़े लेडीज सैलून हैं। बहुत मेहनत से मैंने ये सब बनाया है।
एक दिन मेरे सैलून में एक बहुत अमीर घर की 23 साल की लड़की अंकिता makeover के लिए आई। उस वक्त मैं सैलून में नहीं थी। अंकिता का पूरा makeover मेरी सबसे एक्सपर्ट एम्प्लॉयी आसना ने किया। गलती से आसना ने हल्के रेड की जगह ब्राउन कलर उसके बालों में लगा दिया। जब अंकिता खुद को आईने में देखती है तो उसका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच जाता है। वो पूरा सैलून सर पर उठा लेती है और मालिक को बुलाने की जिद पकड़ लेती है।
जैसे ही मैं सैलून पहुँची रिसेप्शन रूम में अंकिता पैर पर पैर चढ़ाकर आराम से बैठी हुई थी। उसके हाथ में लेदर की मोटी बेल्ट थी। मेरी आँखें फट गईं जब मैंने देखा कि आसना चूतड़ हवा में उठाए दोनों हाथ कानों के नीचे डाले मेरे सामने मुर्गा बनी हुई खड़ी है। आसना की हालत देखकर साफ पता चल रहा था कि उसे पहले ही कई बेल्ट लग चुकी हैं। उसकी आँखें लाल थीं साँस फूल रही थी और नीली पैंट वाली यूनिफॉर्म पर पसीना चमक रहा था।
मैं जैसे ही कुछ बोलने को मुँह खोलती हूँ अंकिता एक जोरदार थप्पड़ मेरे गाल पर लगा देती है। इतना तेज था कि मेरे कान में घंटी बज गई। वो चिल्लाई मैं तुम्हारे सैलून का लाइसेंस कैंसल करवा दूँगी तुम्हारी ये गलती मेरे बाल बर्बाद कर चुकी है।
मैं डर के मारे काँप उठी। मैंने हाथ जोड़कर दया की भीख माँगनी शुरू कर दी अंकिता जी प्लीज मैंने बहुत मेहनत से ये सैलून बनाया है कृपा करके लाइसेंस मत कैंसल करवाइए जो भी सजा देना हो दे दीजिए बस मेरा बिजनेस मत छीनिए।
अंकिता मुस्कुराई और बोली ठीक है लाइसेंस मैं अभी नहीं कैंसल करवा रही लेकिन तुम्हें सजा तो मिलेगी और अगर सजा ठीक से पूरी नहीं की तो मैं अपना फैसला बदल दूँगी।
मैं तुरंत मान गई। अंकिता ने सख्त आवाज में हुक्म दिया मुर्गा बनो।
मैं जैसे ही दोनों हाथ कानों के नीचे डालकर मुर्गा बनने लगी अंकिता ने लेदर बेल्ट का एक बहुत जोरदार स्ट्रोक मेरी कमर पर लगा दिया चटाक्क की आवाज हुई और मेरे नितंबों पर आग सी लग गई। मैं चीख उठी आह्ह।
अंकिता बोली चूतड़ अच्छे से ऊपर करो टाइट मुर्गा बनाओ ढीला नहीं।
मैं डर के मारे अपना बदन पूरा टाइट करके मुर्गा बन गई। मैंने काला लोअर और रेड टीशर्ट पहनी हुई थी। लोअर की वजह से मेरे दोनों गोल नितंबों के बीच की धारी साफ दिख रही थी। लोअर के ऊपर से मेरे भरे भरे चूतड़ बहुत खूबसूरत लग रहे थे। अंकिता बार बार बेल्ट से मेरी गांड पर वार कर रही थी और हर बार चिल्ला रही थी ऊपर और ऊपर।
आसना को मुर्गा बने ३० मिनट से ज्यादा हो चुके थे। उसकी हालत बहुत खराब हो चुकी थी। उसकी नीली पैंट और स्काई ब्लू शर्ट पसीने से भीग चुकी थी। घुटनों में ऐंठन हो रही थी जाँघें काँप रही थीं। जैसे ही आसना थोड़ा सा हिली अंकिता ने उसकी पीठ और चूतड़ पर बेल्ट की बरसात कर दी चटाक चटाक चटाक कई लगातार वार पड़े। आसना जोर जोर से चीखने लगी मैडम प्लीज बहुत दर्द हो रहा है मेरी गांड जल रही है अब बस कर दीजिए मैं मर जाऊँगी।
उसकी ये दशा देखकर मैं और भी सख्ती से कान पकड़ लेती हूँ। मेरी आँखों से आँसू बहने लगे थे। घुटनों और कमर में तेज दर्द हो रहा था।
एक घंटे तक हम दोनों को लगातार मुर्गा बनाए रखा गया। इस पूरे समय में हमें कम से कम ५० ५० बेल्ट खानी पड़ीं। हर बेल्ट के साथ मेरे नितंबों पर नई लाल धारी उभर रही थी। दर्द इतना तेज था कि मैं बार बार रोते हुए भीख माँग रही थी अंकिता जी बहुत जलन हो रही है मेरी गांड फट गई प्लीज अब छोड़ दीजिए आगे से कभी गलती नहीं होगी बहुत शर्म आ रही है।
एक घंटे बाद अंकिता ने कहा अब मुर्गा परेड शुरू होगी अपने ही स्टाफ के सामने मुर्गा बनकर घूमोगी।
हम दोनों को मुर्गा बनाकर सैलून के अंदर ही परेड करनी पड़ी। मेरे अपने वर्कर्स सब कुछ देख रहे थे। मुझे बहुत शर्म आ रही थी। मैं ३२ साल की मालकिन हूँ इतनी खूबसूरत और इंडिपेंडेंट और आज अपने ही सैलून में नंगे चूतड़ करके मुर्गा बनकर घूम रही हूँ। हर कदम के साथ बेल्ट की मार पड़ रही थी। आसना भी मेरे साथ रो रही थी।
आधे घंटे की मुर्गा परेड के बाद अंकिता ने हमें फर्श पर लिटा दिया और हुक्म दिया अब सिट अप्स लगाओ हर सिट अप में जोर से बोलना सॉरी अंकिता मिस।
हम दोनों थक चुकी थीं लेकिन मजबूरी थी। हर बार उठते हुए हम चीखते हुए बोल रही थीं सॉरी अंकिता मिस आह्ह सॉरी अंकिता मिस बहुत दर्द हो रहा है सॉरी अंकिता मिस।
हमारी कमर जाँघें और नितंब पहले से ही बेल्ट से फटे हुए थे। हर सिट अप में दर्द दोगुना हो जाता था। आसना कई बार बीच में रुक जाती थी तो अंकिता तुरंत बेल्ट से उसकी जाँघों पर मार देती। मैं भी रोते रोते बोल रही थी प्लीज अंकिता जी अब बस मैं आगे से कभी शिकायत का मौका नहीं दूँगी मेरी टाँगें टूट रही हैं।
करीब १०० सिट अप्स के बाद अंकिता ने आखिरकार हमें छोड़ दिया। हम दोनों फर्श पर पड़ी हुई थीं। साँस फूल रही थी आँखों से आँसू बह रहे थे नितंबों पर लाल लाल निशान थे। अंकिता ने आखिरी बार चेतावनी दी याद रखना अगली बार ऐसी गलती हुई तो सजा और भी भारी होगी।
उस दिन के बाद मैंने अपने सैलून में बहुत सख्ती कर दी। आज भी जब मैं उस दिन को याद करती हूँ तो मेरी गांड पर उन बेल्ट के निशान याद आ जाते हैं और शर्म से मेरा चेहरा लाल हो जाता है।
तो ये थी मेरी दर्द भरी मुर्गा बनने कि कहानी और आप सबको कहानी कैसी लगी कोमेंट मे जरुर बताएं...
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