हमारे स्कूल मे लड़कियो को मिली सख्त सजा - Hindi Murga Punishment Stories

हमारे स्कूल मे लड़कियो को मिली सख्त सजा - Hindi Murga Punishment Stories

नमस्ते, मेरा नाम रिया गुप्ता है। मैं 12वीं क्लास में पढ़ती हूँ। हमारे स्कूल में लड़कियों को बहुत ज्यादा सजा मिलती है। यहाँ लड़के और लड़कियों में बिल्कुल कोई भेदभाव नहीं है। मेम हो या सर, गलती करने पर दोनों को बहुत हार्ड और दर्द भरी सजा देते हैं। आम स्कूलों में बड़ी क्लास की लड़कियों को सजा नहीं दी जाती, लेकिन हमारे स्कूल में उल्टा है। खासकर 12वीं क्लास की लड़कियों को तो कभी-कभी लड़कों से भी ज्यादा पिटाई पड़ती है।

मेरे पास बचपन से लेकर अब तक की ढेर सारी सच्ची सजा की कहानियाँ हैं। मैं सब धीरे-धीरे शेयर करूँगी, लेकिन आज मैं आपको वो घटना बताती हूँ जो सिर्फ कुछ दिन पहले हुई थी।

उस दिन हमारी क्लास में मिसेज़ शर्मा मैम की पीरियड चल रही थी। मैम आर्मी से रिटायर्ड हैं। बहुत सख्त, खड़ूस और डिसिप्लिन पसंद। हमेशा अपने साथ एक मोटा, लंबा बाँस का डंडा लेकर घूमती रहती हैं। लड़कों को तो वो बुरी तरह मारती हैं, लेकिन लड़कियों को भी बिल्कुल नहीं छोड़ती। बाल पकड़कर थप्पड़ मारना उनकी आदत है।

उस दिन लड़के तो चुपचाप बैठे हुए थे, लेकिन हम लड़कियाँ पीछे की तीन बेंचों पर बैठकर खूब मस्ती कर रही थीं। हँस रही थीं, आपस में बातें कर रही थीं, एक-दूसरे को चिढ़ा रही थीं। हमें लगा कि मैम लड़कियों को, खासकर 12वीं की सीनियर गर्ल्स को ज्यादा सजा नहीं देंगी।

मैम ने पहले तो दो बार शांत रहने को कहा। फिर तीसरी बार जोर से वार्निंग दी, अगर अभी भी बात की तो सबको बाहर बुलाकर सजा दूँगी!

लेकिन हमने उनकी बात नहीं मानी। हम और जोर-जोर से बात करने लगीं। अचानक मैम का चेहरा गुस्से से लाल हो गया। वो तेजी से उठीं और गरजकर बोलीं,

सारी लड़कियाँ! अभी खड़ी हो जाओ! All girls stand up right now!

हम सब डर के मारे तुरंत खड़ी हो गईं। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। मैम ने डंडा मेज पर जोर से पटका और चिल्लाईं, सब बाहर लॉबी में निकलो! अभी! कोई बहाना नहीं!

हम 18 लड़कियाँ डरते-डरते क्लास से बाहर लॉबी में चली गईं। लॉबी खाली थी। सबकी यूनिफॉर्म में स्कर्ट और ब्लैक लैगिंग्स थीं। 12वीं क्लास में होने के कारण सबको बहुत शर्म आ रही थी। मैम हमारे सामने आकर खड़ी हो गईं। उनकी आँखों में आग लगी हुई थी। उन्होंने कहा,

बहुत हो गया तुम लोगों का मजाक! आज तुम्हें याद दिलाती हूँ कि स्कूल में डिसिप्लिन क्या होती है। सब मुरगा बनो! अभी!

हम सब शर्म से सिर झुका लिए। एक लड़की हिम्मत करके बोली, मैम प्लीज… हम सीनियर गर्ल्स हैं… स्कर्ट में मुरगा बनाना बहुत मुश्किल है… शर्म आ रही है…

मैम को और गुस्सा आ गया। उन्होंने झपटकर सबसे पहले मुझे पकड़ लिया।

मेरे लंबे बालों को मुट्ठी में भरकर जोर से खींचा और एक के बाद एक चार-पाँच जोरदार थप्पड़ मेरे दोनों गालों पर लगा दिए।थप्पड़! थप्पड़! थप्पड़! थप्पड़!

हर थप्पड़ के साथ तेज़ आवाज हो रही थी। मेरा पूरा चेहरा जलने लगा। गाल सुज गए। आँखों से आँसू बहने लगे। फिर उन्होंने बाकी सब लड़कियों को भी एक-एक करके थप्पड़ मारे। जो भी थोड़ा सा भी विरोध करती, उसे दो-दो एक्स्ट्रा थप्पड़ पड़ जाते अब चुपचाप मुरगा बनो! कोई बहाना नहीं चलेगा!

हम सबने मजबूरन मुरगा बनना शुरू किया। स्कर्ट ऊपर चढ़ रही थी,

लैगिंग्स में घुटने मोड़ना मुश्किल हो रहा था। फिर भी सब लड़कियाँ मुरगा बन गईं – दोनों हाथ घुटनों के नीचे दबाए, सिर नीचे झुकाए, कमर (hips) नीचे की ओर।

जैसे ही हमने hips नीचे की, मैम ने डंडा उठाया और पहली लड़की की दोनों hips पर जोर से मारा – **धप्प्प!!

आआआह्ह्ह!! मैम! वो तेज चीख पड़ी। फिर दूसरी, तीसरी… और मेरी बारी आई।

**धप्प्प!!

डंडा मेरी दोनों hips पर एक साथ पड़ा। तेज़ दर्द की लहर कमर से लेकर पैरों तक दौड़ गई। लगा जैसे कोई आग का तार छू गया हो। मैं आह्ह्ह! करके काँप गई।

मैम चिल्लाईं, hips ऊपर! कमर ऊपर रखो! नीचे किया तो और मारूँगी! सब लड़कियाँ डर के मारे hips को जितना ऊपर उठा सकती थीं, उठाए रखने लगीं। लेकिन मुरगा पोजीशन में hips ऊपर रखना बहुत मुश्किल था। थोड़ी देर बाद थकान और दर्द से hips अपने आप नीचे झुकने लगते थे।

जैसे ही किसी लड़की की hips थोड़ी भी नीचे होती, मैम तुरंत उसके पास पहुँच जातीं और दो-दो जोरदार डंडे hips पर लगा देतीं – **धप्प! धप्प!

आआआह्ह्ह… मैम बहुत दर्द हो रहा है… प्लीज… मै रो रही थी… और कह रही थी कि माफ कर दो… मेडम 

और मैम का एक ही जवाब था, जितना रोना है मुरगी बनकर रोओ! hips ऊपर रखो! फिर उन्होंने हम सबको सीधी लाइन में खड़ा कर दिया। एक के पीछे एक। और लाइन से गुजरते हुए हर लड़की की hips पर डंडे चलाने शुरू कर दिए।

**धप! धप! धप! धप!

हर डंडे के साथ तेज़ चीख निकल रही थी। लॉबी में सिर्फ डंडों की आवाज और लड़कियों की रोने-चिल्लाने की आवाजें गूँज रही थीं। उसके बाद मैम ने घोषणा की, अब हर लड़की को लाइन से 10-10 डंडे!

वे फिर से लाइन के शुरू से शुरू हुईं। हर लड़की के hips पर ठीक 10 जोरदार डंडे। 

जब मेरी बारी आई तो मैं पहले से ही रो रही थी। पहला डंडा पड़ा तो लगा कमर टूट जाएगी। दूसरा… तीसरा… हर डंडे के साथ दर्द बढ़ता जा रहा था। आठवें डंडे तक मेरी आँखों से आँसू की धारा बह रही थी।  

दसवें डंडे पर मैं जोर से चीख पड़ी, आआआह्ह्ह मैम!! बस!!

लेकिन मैम रुकी नहीं। पूरा पीरियड भर हम सबको मुरगा बनी रहना पड़ा। hips को ऊपर रखने के लिए पैर काँप रहे थे। कमर में तेज़ जलन और दर्द हो रहा था। जो भी लड़की थककर hips नीचे करती, उसे तुरंत दो एक्स्ट्रा डंडे पड़ जाते। हम सब रो-रोकर मैम प्लीज… बहुत जल रहा है… hips फट गए… कह रही थीं, लेकिन मैम बिल्कुल नहीं मान रही थीं।

आखिरकार पीरियड खत्म होने की घंटी बजी। मैम ने आखिरी बार हर लड़की की hips पर एक-एक जोरदार डंडा मारा और बोलीं,

अब क्लास में जाओ। अगली बार अगर कोई बात की तो पूरे असेंबली में सजा दूँगी!

हम सब रोते हुए, hips को दोनों हाथों से रगड़ते हुए क्लास में वापस आईं। बैठते समय बहुत तेज़ दर्द हो रहा था। जैसे किसी ने लोहे की छड़ से दाग दिया हो। स्कर्ट और लैगिंग्स hips पर चिपक रही थीं और जलन और बढ़ा रही थीं। हर लड़की अपनी सीट पर बैठते ही उफ्फ… आह्ह… बहुत दर्द हो रहा है… कर रही थी।

कुछ लड़कियाँ अभी भी हल्के-हल्के सुबक रही थीं। मेरे गाल थप्पड़ों से लाल और सुजे हुए थे। hips पर डंडों के निशान बन गए थे जो अगले दो-तीन दिन तक दिख रहे थे।

पूरे क्लास में सन्नाटा छाया हुआ था। कोई हिम्मत नहीं कर रहा था कि फिर से बात करे।

ये थी हमारी उस दिन की सजा। बहुत दर्द हुआ था, बहुत शर्म भी आई थी, लेकिन स्कूल का नियम है – गलती की तो सजा मिलेगी, चाहे लड़का हो या लड़की।

तो ये थी दोस्तो हमारे स्कूल मे लड़कियो को मिलने कि रियल मुर्गा पनिशमेंट स्टोरी और आप सबको कहानी कैसी लगी कोमेंट मे जरुर बताएं...


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