पनिशमेंट लवर मिना ने की पुलिस वाली से सजा कि मांग - Hindi Spanking Punishment Stories

पनिशमेंट लवर मिना ने की पुलिस वाली से सजा कि मांग - Hindi Spanking Punishment Stories

मिना एक 28 साल की खूबसूरत लड़की थी। उसके बाल लंबे, काले और उसका शरीर नाजुक लेकिन आकर्षक। वह सूट-सिलवार में बहुत प्यारी लगती थी। लेकिन अंदर से वह एक सजा की दीवानी थी। उसे मार खाने का, चूतड़ों पर पट्टे की मार का, दर्द का और रोने-धोने का मजा आता था। वह इंटरनेट पर हर तरह की सजा की वीडियो देखती थी और खुद को कल्पना में बार-बार सजा दिलाती थी। आज उसने फैसला कर लिया था कि असली सजा चाहिए। वो सीधे थाने गई।

थाने में इंस्पेक्टर रीमा शर्मा ड्यूटी पर थीं। वो एक सख्त, 26 साल की महिला पुलिस अधिकारी थीं। लंबी कद-काठी, काली यूनिफॉर्म में वो बहुत प्रभावशाली लगती थीं। उनके हाथ में वही मोटा चमड़े का पट्टा था जिससे वो अपराधियों को मारती थीं।

मिना ने काउंटर पर झुककर धीरे से कहा, मैडम... आप अपराधियों को उनके चूतड़ों पर इसी पट्टे से मारती हो ना? मुझे भी... उसी पट्टे से मारो ना।

रीमा चौंक गईं। उनकी आँखें फट गईं। क्या बकवास कर रही हो? तू कौन है? यहाँ मजाक करने आई है?

मिना ने घबराकर नहीं, बल्कि मुस्कुराते हुए अपना फोन निकाला। मैडम, मजाक नहीं। मुझे सजा की बहुत जरूरत है। मैं पनिशमेंट लवर हूँ। देखो... उसने इंटरनेट से डाउनलोड की हुई वीडियो खोल दीं। वीडियो में लड़कियाँ मेज पर झुकी हुई थीं, उनकी चूतड़ों पर पट्टे की मार पड़ रही थी, वो रो रही थीं, चीख रही थीं, लेकिन उनके चेहरे पर अजीब सा आनंद था।

रीमा वीडियो देखकर स्तब्ध रह गईं। ये... ये क्या है? तुझे सजा का मजा आता है? तू पागल है क्या?

मिना ने सिर झुकाकर कहा, हाँ मैडम... मुझे दर्द में मजा आता है। मेरे चूतड़ लाल-लाल हो जाएँ, जलन हो, मैं रोऊँ, चीखूँ, लेकिन मुझे और चाहिए। प्लीज... मुझे असली सजा दो। मैंने कोई अपराध नहीं किया, लेकिन मुझे सजा चाहिए।

रीमा ने चारों तरफ देखा। थाना खाली था। रात के १० बज चुके थे। उसने एक गहरी साँस ली और बोली, ठीक है... चल, अंदर कमरे में चल। लेकिन याद रख, एक बार शुरू किया तो मैं रुकने वाली नहीं।

दोनों अंदर वाले छोटे इंटरोगेशन रूम में चली गईं। कमरा बंद था, अंदर सिर्फ एक मेज, कुर्सी और दीवार पर लटकता पट्टा था।

रीमा ने दरवाजा बंद करते ही कड़क स्वर में कहा, सलवार-कुर्ता नीचे कर। पूरी तरह।

मिना का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। उसने काँपते हाथों से सूट की सलवार का नाड़ा खोला। हल्का नीला सूट-सिलवार धीरे-धीरे उसके घुटनों तक सरक गया। उसके सफेद, गोल चूतड़ हवा में नंगे हो गए। रीमा ने देखा कि मिना ने कोई अंडरगारमेंट नहीं पहना था।

अब मुरगा बन! रीमा ने आदेश दिया।

मिना ने तुरंत घुटनों पर बैठकर दोनों हाथों को टांगों के बीच से निकाला और कानों को पकड़ लिया। मुरगा बनते ही उसकी जाँघें काँपने लगीं। चूतड़ और भी ऊपर उठ गए। रीमा ने पट्टा उठाया और पहले ही झटके में मिना के बाएँ चूतड़ पर जोरदार प्रहार किया।

“आआआह!” मिना की चीख निकल गई। पट्टे की आग सी जलन फैल गई।

रीमा ने ठंडे स्वर में कहा, उठक-बैठक शुरू कर। हर बार नीचे जाते वक्त चूतड़ ऊपर करने हैं। गिनती मैं करूँगी।

मिना ने काँपते हुए पहली उठक-बैठक लगाई। जैसे ही वो नीचे गई, रीमा ने पट्टा उसके दोनों चूतड़ों पर दे मारा। एक!

आह... मैडम... दर्द हो रहा है! मिना रो पड़ी। लेकिन उसकी आँखों में आंसू के साथ आनंद भी था।

दूसरी, तीसरी... दसवीं उठक-बैठक तक मिना के चूतड़ लाल हो चुके थे। पट्टे की हर मार से उसके शरीर में बिजली सी दौड़ रही थी। वो रो रही थी, मैडम... जल रहा है... लेकिन... और दो ना...

रीमा ने मुस्कुराते हुए कहा, अब मेज पर झुक।

मिना ने मेज पर पेट के बल लेटकर अपनी कमर को मोड़ दिया। उसके गोल चूतड़ पूरी तरह ऊपर थे। रीमा ने पट्टा दो बार हवा में घुमाया और फिर पूरे जोर से मारा।

धड़ाक!

“आआआह... मम्मी!” मिना की चीख कमरे में गूँज गई। पट्टा उसके चूतड़ों पर गहरी लाल लकीर छोड़ गया। दर्द इतना तेज था कि मिना के आँसू की धार बहने लगी। लेकिन उसकी योनि से गीला होने लगा।

रीमा ने पूछा, क्या मजा आ रहा है मीना?

मिना रोते-रोते मुस्कुराई, हाँ... मैडम... बहुत मजा आ रहा है... सजा में... मुझे बहुत मजा आता है... और मारो... कृपा करके और जोर से...

रीमा ने अब क्रूरता से मारना शुरू कर दिया। पट्टा एक के बाद एक पड़ता जा रहा था।

धड़ाक! धड़ाक! धड़ाक!

आह... उफ्फ... मर गई... जल रहा है... चूतड़ फट रहे हैं! मिना चीख-चीखकर रो रही थी। उसके चूतड़ अब पूरी तरह लाल-नीले हो चुके थे। हर मार के साथ उसके शरीर में झुरझुरी सी दौड़ रही थी। दर्द इतना था कि वो मेज को दोनों हाथों से जकड़कर काँप रही थी, लेकिन उसकी कमर खुद-ब-खुद ऊपर उठ रही थी, जैसे और मार माँग रही हो।

रीमा ने बीच-बीच में रुककर उसके चूतड़ों को सहलाया। देख... कितने लाल हो गए हैं। अभी भी और चाहिए?

हाँ... मैडम... प्लीज... मुझे और सजा दो... मैं पनिशमेंट लवर हूँ... रोना, दर्द, सब मुझे अच्छा लगता है...

रीमा ने पट्टा अब और तेजी से चलाया। बीस... पच्चीस... तीसवीं मार। मिना अब बिल्कुल बेकाबू हो चुकी थी। वो जोर-जोर से रो रही थी, आह... दर्द... बहुत दर्द... लेकिन... रुकना मत... मुझे और चाहिए...

उसके चूतड़ों पर पट्टे के निशान गहरे हो चुके थे। हर मार के साथ जलन इतनी बढ़ जाती कि मिना के पैर काँपने लगते। आँसू उसकी ठोड़ी तक बह रहे थे। लेकिन उसकी आँखों में वही दीवाना आनंद था।

रीमा ने अंत में पट्टा नीचे रख दिया और मिना के लाल चूतड़ों को हल्के से थपथपाया। बस... अब काफी हुआ।

मिना हाँफते हुए बोली, नहीं... मैडम... कल फिर आऊँगी... मुझे रोज ऐसी सजा चाहिए...

रीमा ने मुस्कुराते हुए कहा, ठीक है सजा दीवानी... लेकिन अगली बार और क्रूर सजा मिलेगी। अब सलवार ऊपर कर और घर जा।

मिना ने काँपते हाथों से सलवार चढ़ाई। चूतड़ों पर पट्टे की जलन अभी भी इतनी थी कि बैठना भी मुश्किल हो रहा था। लेकिन उसके चेहरे पर संतोष और खुशी का मिश्रण था।

वो धीरे-धीरे थाने से बाहर निकली। उसके मन में बस एक ही बात थी – कल फिर आना है... और भी ज्यादा क्रूर, ज्यादा लंबी, ज्यादा दर्द भरी सजा के लिए।

और अगले दिन सुबह-सुबह मिना फिर थाने पहुँच गई। उसके चूतड़ अभी भी कल की पट्टे की मार से हल्के-हल्के दुख रहे थे, लेकिन वो दर्द उसे और ज्यादा उत्तेजित कर रहा था। थाने के गेट पर पहुँचते ही उसे एक कमरे से जोर-जोर की चीखें सुनाई दीं – आआह... मैडम... छोड़ दो... मैं मर जाऊँगा... आह... बहुत जल रहा है...!

मिना का दिल जोर से धड़कने लगा। उसने इधर-उधर देखा, कोई नहीं था। वो चुपके से उस कमरे की खिड़की के पास पहुँची और अंदर झाँकने लगी।

अंदर का नजारा देखकर मिना की साँस रुक गई।

एक 22-23 साल का लड़का पूरी तरह नंगा था। उसे मुरगा बनाकर खड़ा किया गया था – घुटनों के बल बैठा, दोनों हाथ टाँगों के बीच से निकालकर कानों को पकड़े हुए। उसकी गाँड में एक मोटा लकड़ी का डंडा घुसा हुआ था, पूरा अंदर तक। डंडे पर तेल और लाल मिर्च का पाउडर लगा था। लड़का बुरी तरह काँप रहा था, उसकी गाँड लाल होकर फूल गई थी। आँसू उसके गालों पर बह रहे थे।

रीमा मैडम उसके सामने खड़ी थीं, हाथ में पट्टा लिए।

चिल्ला... चिल्ला के रो... आज तुझे सिखा दूँगी कि लड़कियों को छेड़ना क्या होता है! रीमा ने कड़क स्वर में कहा और डंडे को हल्का-हल्का घुमाया।


लड़का चीख उठा, आआआह... मैडम... प्लीज... छोड़ दो... मैं आगे से कभी लड़की नहीं छेड़ूँगा... बहुत जल रहा है... गाँड फट रही है... मम्मी... बचाओ...!


रीमा ने डंडा जोर से निकाला। लड़के की चीख आसमान छू गई। फिर उसे मेज पर उल्टा लिटा दिया गया। उसके दोनों हाथ पीछे बाँध दिए गए। रीमा ने पट्टा उठाया और पूरी ताकत से लड़के की गाँड पर मारना शुरू कर दिया।

धड़ाक! धड़ाक! धड़ाक!

एक... दो... तीन... हर मार के साथ लड़के की गाँड पर लाल-लाल निशान बन रहे थे।

आह... उफ्फ... मैडम... मारो मत... बहुत दर्द हो रहा है... गाँड जल रही है... और लडका रो रहा था और .. प्लीज.. पलिज कर रहा था. देखते देखते40 पट्टे पड चुके थे...!

लेकिन रीमा रुकी नहीं। पचासवीं मार तक लड़के की गाँड टमाटर की तरह लाल-नीली हो चुकी थी। हर पट्टे की मार से उसकी पूरी देह काँप जाती, आँसू की धार बहती, वो मेज को काटने की कोशिश करता, लेकिन बंधे हाथों के कारण कुछ नहीं कर पाता। दर्द इतना तेज था कि उसकी आवाज फट गई थी, सिर्फ सिसकियाँ रह गई थीं।

आखिरकार रीमा ने पट्टा नीचे रख दिया। लड़के को खोल दिया गया। उसे पानी पिलाया गया, कपड़े दिए गए। लड़का रोता-बिलखता थाने से बाहर निकला।

रीमा बाहर आईं तो मिना को खड़ा देखकर मुस्कुरा दीं। अरे मीना! इतनी जल्दी? आ, अंदर चल। चाय पीते हैं।

दोनों अंदर बैठ गईं। रीमा ने चाय बनाई और मिना को दी। मिना ने चाय का घूँट लिया और शरमाते हुए बोली, मैडम... मुझे भी उसी लड़के जैसी सजा चाहिए... आज... अभी...

रीमा हँस पड़ीं। अभी? दिन में? मैंने कहा था ना रात को 9 बजे आना। दिन में स्टाफ होता है। अगर तुझे दिन में ही ख़ुजली मच रही थी तो कोई चोरी-वोरी करके आती, मैं दिन में ही तेरी गाँड तोड़ देती। लेकिन अब तू आ ही गई है तो क्या करूँ? साम को ही दे पाऊँगी। रात को थाना खाली होता है, नाइट ड्यूटी मेरी होती है। ठीक 9 बजे आना। और हाँ... घर से कपड़े धोने वाली थपकी ले आना। उसकी मार पट्टे से भी ज्यादा दर्द देती है। तुझे तो ज्यादा मजा आएगा।

मिना की आँखें चमक उठीं। जी मैडम... मे जरूर ले आऊँगी।

रीमा मुस्कुराईं, अच्छी लड़की।

शाम को ठीक 9 बजे मिना थाने पहुँच गई। हाथ में एक मोटी लकड़ी की थपकी थी – वो वाली जो घरों में कपड़े पीटने के लिए इस्तेमाल होती है। थाना सुनसान था। मिना ने इधर-उधर ढूँढा। तभी एक कमरे से सिसकारियाँ और हल्की-हल्की चीखें आने लगीं – आह... हाँ... और जोर से... चाट... साफ कर...

मिना ने दरवाजा थोड़ा खोला और अंदर का मंजर देखकर उसके पैर थर्रा गए।

रीमा मैडम कुर्सी पर बैठी थीं, उनकी खाकी पैंट घुटनों तक नीचे थी। उनकी जाँघें फैली हुई थीं। उनके जूनियर कांस्टेबल राखी (26 साल की गोरी, मोटी-गांड वाली) घुटनों के बल बैठी थी और रीमा की चूत को जोर-जोर से चाट रही थी। रीमा की आँखें बंद थीं, एक हाथ राखी के सिर पर था।

रीमा ने आँख खोलीं और मिना को देख लिया। वो मुस्कुराईं, आ जा मीना... तू भी आ। कल मैंने तेरी जरूरत पूरी की थी, आज तू मेरी पूरी कर। 20 मिनट तक मेरी चूत चाट... अच्छे से... जीभ अंदर डाल... साफ कर... फिर मैं तुझे ऐसी सजा दूँगी कि याद रहेगी। तेरे मोटे-मोटे चूतड़ लाल कर दूँगी। और मेरे साथ ये कांस्टेबल राखी भी तुझे सजा देगी। मैंने इसे सब बता दिया है कि तू पनिशमेंट लवर है।

मिना का चेहरा लाल हो गया, लेकिन उसने विरोध नहीं किया। वो घुटनों के बल रीमा के सामने बैठ गई। राखी हट गई। मिना ने अपनी गर्म-गर्म जीभ रीमा की चूत पर फेरनी शुरू कर दी। रीमा ने सिर पीछे टिका दिया और moan करने लगीं, हाँ... गहरी... चूस...

मिना ने पूरी लगन से चाटा। उसकी जीभ अंदर-बाहर होती रही। रीमा की चूत से रस निकल रहा था, मिना उसे चूस-चूसकर साफ करती रही। 20 मिनट बाद रीमा ने जोर से काँपकर झड़ गईं।

अब चल... दूसरे कमरे में तीनों दूसरे इंटरोगेशन रूम में चली गईं। दरवाजा बंद किया गया रीमा ने आदेश दिया, सलवार-कुर्ता नीचे... पूरी तरह नंगी हो जल्दी

मिना ने काँपते हाथों से सूट सलवार उतारी। उसके मोटे, गोल चूतड़ हवा में नंगे हो गए।

और फिर मिना की गांड मे ब्रा और पैंटी डूस दी और कहा की पुरी 100 उठक-बैठक करो और फिर मिना उठक-बैठक करने लगी और अगर रिमा‌ सही से निचे नही बेठती थी तो राखी ऊसकी गांड पर जोर से थपकी मारती जिसे मिना का सारा बदन हिल जाता और चिख निकल जाती और वह रो भी रही थी और उठक-बैठक खत्म करने के बाद 

फिर रिमा बोली पहले मुरगा बन... राखी, तू थपकी से मारना ऊपर निचे होते ही।

फिर मिना मुरगा बन गई। जैसे ही वो थोडी देर बाद नीचे गई, राखी ने थपकी का पहला प्रहार उसके चूतड़ों पर किया।

धड़ाक!

मिना की चीख निकल गई - आआआह क्यूंकि थपकी की मार पट्टे से कहीं ज्यादा भारी और दर्द भरी थी। जैसे लकड़ी के चूतड़ों पर गर्म तवा पड़ा हो। जलन तुरंत फैल गई एक... दो...हर बार ऊपर निचे होने पर थपकी पड़ती रही। दसवीं तक मिना रो पड़ी। और रोती हुई बोली मैडम... बहुत दर्द... चूतड़ फट रहे हैं... आह... बहुत दर्द है रहा है.. लेकिन... और दो...

बीसवीं तक उसके चूतड़ लाल हो चुके थे। तीसवीं पर वो चीखने लगी, मम्मी... बचाओ... जल रहा है... दर्द... बहुत तेज दर्द... लेकिन मजा भी आ रहा है... रीमा हँस रही थीं। 

और फिर रिमा मेडम बैली अब मेज पर झुक... कमर मोड़... गाँड ऊपर।

मिना मेज पर झुक गई। रीमा ने खुद थपकी ली। अब असली सजा शुरू... 40 बार थपकी की मार...

धड़ाक! धड़ाक! धड़ाक!

पहली थपकी से ही मिना की चीख कमरे में गूँज गई। आआह... मैडम... बहुत जोर से... गाँड में आग लग गई... हर मार के साथ उसके चूतड़ हिल रहे थे। लाल निशान बन रहे थे। पच्चीसवीं मार तक वो बिल्कुल बेकाबू हो गई। आँसू की धार बह रही थी, नाक से पानी निकल रहा था, वो मेज को जकड़े रो रही थी – उफ्फ... मर गई... दर्द... बहुत दर्द... चूतड़ फूल गए... जलन... लेकिन... रुकना मत... मुझे और चाहिए... मैं पनिशमेंट लवर हूँ...

रीमा बीच में रुककर उसके चूतड़ों को सहलातीं, फिर और जोर से मारतीं। राखी भी बारी-बारी थपकी चला रही थी। चूतड़ अब पूरी तरह टमाटर जैसे लाल-नीले हो चुके थे। हर थपकी के बाद मिना की देह में झुरझुरी दौड़ जाती, दर्द सीधे उसके दिमाग तक पहुँच रहा था, लेकिन उसी दर्द में उसे अजीब सा आनंद मिल रहा था। उसकी योनि से रस टपक रहा था।

आखिरी दस मार रीमा ने खुद लगाईं – सबसे तेज।

“पचास!”

मिना चीखते-चीखते बेहाल हो गई। आह... बस... अब बस... लेकिन... कल फिर आऊँगी... रीमा ने थपकी रख दी। दोनों ने मिना के लाल चूतड़ों को हल्के से थपथपाया। जलन इतनी थी कि मिना हिल भी नहीं पा रही थी।

अब कपड़े पहन... घर जा। लेकिन याद रख... अगली बार और क्रूर सजा मिलेगी।

मिना ने काँपते हाथों से सलवार चढ़ाई। बैठना मुश्किल हो रहा था। लेकिन उसके चेहरे पर संतोष था।

और वो अब चार दिन बाद आती है और इन 4 दिनों में मिना के चूतड़ों के निशान धीरे-धीरे हल्के पड़ गए थे, लेकिन हर बार बैठते या चलते वक्त उसे कल की मार याद आ जाती थी। दर्द कम हो गया था, लेकिन उसकी भूख बढ़ गई थी। वो और भी क्रूर, और भी लंबी सजा चाहती थी। ठीक उसी तरह जैसी उसने 4 दिन पहले उस लड़के को मिलते देखी थी – नंगा मुरगा, गाँड में मोटा डंडा, तल और मिर्च, फिर मेज पर उल्टा लिटाकर 5० पट्टे।

रात के 9:10 बजे मिना थाने पहुँची। हाथ में थपकी नहीं थी इस बार। वो सीधे रीमा मैडम के पास गई।

रीमा ने उसे देखते ही मुस्कुराकर कहा, 4 दिन बाद आई है? चूतड़ ठीक हो गए क्या? या अब और सजा की प्यास लगी है?

मिना शरमाते हुए सिर झुकाकर बोली, मैडम... मुझे उस लड़के जैसी सजा चाहिए... ठीक वैसी ही... नंगा मुरगा... गाँड में मोटा डंडा... तल और लाल मिर्च... फिर मेज पर उल्टा लिटाकर 50 पट्टे... और अगर आप चाहें तो और भी ज्यादा...

रीमा की आँखें चमक उठीं। बहुत हिम्मत है तेरी। ठीक है। आज तुझे वही सजा मिलेगी जो उस लड़के को मिली थी, लेकिन तेरे लिए मैं इसे और क्रूर बना दूँगी। राखी और प्रिया भी आज ड्यूटी पर हैं। तीनों मिलकर तुझे सजा देंगे। अंदर चल।

तीनों पुलिस वाले मिना को लेकर अंदर वाले इंटरोगेशन रूम में ले गईं। दरवाजा बंद कर दिया गया।

रीमा ने सख्त स्वर में आदेश दिया, सब कपड़े उतार। पूरी तरह नंगी हो जा।

मिना ने काँपते हाथों से सूट-सिलवार, ब्रा और पैंटी सब उतार दिए। उसके मोटे, गोल, सफेद चूतड़ हवा में नंगे हो गए। तीनों महिला पुलिस वाले उसे घूर रही थीं।

रीमा बोलीं, पहले मुरगा बन।

मिना तुरंत घुटनों के बल बैठ गई, दोनों हाथ टाँगों के बीच से निकालकर कानों को पकड़ लिए। उसकी गाँड ऊपर उठ गई।

रीमा ने एक मोटा, गोल लकड़ी का डंडा निकाला – करीब 2.5 इंच मोटा और 12 इंच लंबा। उस पर पहले तेल लगाया, फिर भारी मात्रा में तल (नमक) और लाल मिर्च पाउडर लगा दिया।

अब साँस रोक और ढीला कर।

मिना ने आँखें बंद कर लीं। रीमा ने डंडे का सिरा उसके गाँड के छेद पर रखा और धीरे-धीरे लेकिन जोर से अंदर धकेलना शुरू कर दिया।

“आआआह...!” मिना की जोरदार चीख निकल गई। डंडा आधा अंदर घुसते ही जलन शुरू हो गई। तल और मिर्च की आग सी लग गई।

रीमा ने और जोर लगाया। पूरा डंडा मिना की गाँड में चला गया। सिर्फ थोड़ा सिरा बाहर था।

आह... मैडम... बहुत जल रहा है... गाँड फट रही है... आग लग गई... रो रही हूँ... बहुत दर्द...! मिना मुरगा बनकर काँप रही थी। आँसू तुरंत बहने लगे। जलन इतनी तेज थी कि उसके पैर थरथरा रहे थे।

रीमा ने डंडे को हल्का-हल्का घुमाया। मिना चीख उठी, उफ्फ... मम्मी... बचाओ... बहुत तेज जलन... अंदर आग है... प्लीज... निकाल दो... लेकिन... निकालना मत... मुझे ये दर्द चाहिए...!

राखी और प्रिया हँस रही थीं। रीमा बोलीं, अब उठक-बैठक लगा। ५० बार। हर बार नीचे जाते वक्त डंडा और अंदर जाएगा।

मिना ने काँपते हुए पहली उठक-बैठक लगाई। जैसे ही वो नीचे गई, रीमा ने डंडे को और गहरा धकेल दिया।

“आआआह...!” मिना की चीख और तेज हो गई। जलन दोगुनी हो गई।

हर उठक-बैठक पर डंडा घुसता, निकलता और मिर्च की आग बढ़ाती। २० तक मिना बिलख रही थी, बहुत दर्द... गाँड जल रही है... आँसू नहीं रुक रहे... चीख रही हूँ... लेकिन मजा... बहुत मजा आ रहा है... और करो...!

5० पूरी होने तक मिना का पूरा शरीर पसीने से तर था। वो रोते-रोते भीख माँग रही थी, लेकिन उसकी आँखों में वही दीवानापन था।

रीमा ने आखिरकार डंडा निकाला। जैसे ही डंडा बाहर निकला, मिना की चीख आसमान छू गई। आआह... निकलते वक्त और दर्द... गाँड फट गई...!

अब दूसरी सजा।

मिना को मेज पर उल्टा लिटा दिया गया – पेट के बल नहीं, पीठ के बल, लेकिन कमर को मोड़कर चूतड़ ऊपर की तरफ। दोनों हाथ सिर के ऊपर बाँध दिए गए। पैर फैलाकर मेज के दोनों किनारों से बाँध दिए गए। उसकी गाँड पूरी तरह खुली और ऊपर थी।

रीमा ने पट्टा उठाया – वही मोटा चमड़े का पट्टा।

अब 50 पट्टे... पूरे जोर से।

धड़ाक!

पहली मार पड़ते ही मिना की चीख निकली, आह...!

धड़ाक! धड़ाक! धड़ाक!

हर मार के साथ उसके चूतड़ हिल रहे थे। लाल लकीरें बन रही थीं। 20 मार तक चूतड़ लाल हो गए। २० तक फूल गए। 30 तक मिना जोर-जोर से रो रही थी, मैडम... बहुत दर्द... चूतड़ फट रहे हैं... जलन... आग... रो रही हूँ... चीख रही हूँ... प्लीज... 50 मत... लेकिन... रुकना मत... मुझे और चाहिए...!

राखी और प्रिया भी बारी-बारी पट्टा चला रही थीं। ५०वीं मार रीमा ने खुद लगाई – सबसे तेज।

“पचास!”

मिना की गाँड अब टमाटर की तरह लाल-नीली और सूजी हुई थी। हर जगह पट्टे के गहरे निशान। दर्द इतना तेज था कि वो मेज पर तड़प रही थी, आँसू और नाक का पानी बह रहा था, साँस फूल रही थी। लेकिन वो हाँफते हुए बोली, मैडम... बहुत मजा आया... दर्द... जलन... रोना... सब... लेकिन... और सजा दो ना...

रीमा ने मुस्कुराते हुए कहा, आज के लिए बस। लेकिन तू ५ दिन बाद आई थी, इसलिए अगली बार ५ दिन इंतजार नहीं करवाऊँगी। कल रात फिर आना। और अगली बार मैं तेरे लिए नई सजा रखूँगी – बांस की छड़ी, बर्फ का पानी और ग्रुप पनिशमेंट।

मिना ने काँपते हाथों से कपड़े पहने। सलवार चढ़ाते वक्त चूतड़ों की जलन से वो कराह उठी। बैठना नामुमकिन था। फिर भी उसके चेहरे पर संतोष और खुशी थी। और वो धीरे-धीरे थाने से बाहर निकली।

तो ये थी दोस्तो पनिशमेंट लवर मिना की रियल सपेंकिंग पनिशमेंट स्टोरी और आप सबको कहानी कैसी लगी कोमेंट मे जरुर बताएं...


Insta Punishment Group Link :- https://ig.me/j/Abav3ZwNQMOrRGLv/

अगर किसी भी लडकी को मालकीन बनकर गुलाम को सजा देकर पेसे कमाने है और अगर कोई लडका पेसे देकर मालकीन का Session लेना चहाता है और कोई हमसे Femdom, BDSM, या मुर्गा Punishment Story या Punishment विडियो खरीदना चहाता है तो हमसे वो संपर्क कर सकता है हमारी Insta Id :- @MrJary5858 पर...



Post a Comment

0 Comments