**नई क्रूर सजा की कहानी: बहन की बदले की आग**
**पहला सीन – छेड़छाड़**
शाम के ७ बजे का समय था। कॉलेज से लौट रही २२ साल की **प्रिया** अकेली सड़क पर चल रही थी। अचानक एक बाइक उसके पास रुकी। **राहुल** नाम का २५ साल का लड़का, जो इलाके का बदमाश था, मुस्कुराते हुए बोला, “क्या बात है प्रिया? आज अकेली हो? चल, कहीं घूम आएँ।”
प्रिया ने घबराकर मना किया, “राहुल, मुझे परेशान मत करो।”
लेकिन राहुल नहीं माना। उसने बाइक से उतरकर प्रिया की कलाई पकड़ ली, उसे अपनी तरफ खींचा और उसके गाल पर हाथ फेरते हुए कहा, “अरे छोड़ो ना... एक बार तो मजा ले।” उसने प्रिया को दीवार से दबाने की कोशिश की।
प्रिया ने जोर से धक्का दिया और भागते हुए घर पहुँच गई। उसके आँसू निकल आए। उसकी बड़ी बहन **इंस्पेक्टर रीमा शर्मा** उसी थाने की SHO थीं – ३६ साल की सख्त, खूबसूरत और बहुत डिसिप्लिन वाली महिला पुलिस अधिकारी।
प्रिया ने रोते हुए सब कुछ बहन को बताया। रीमा का चेहरा लाल हो गया। उन्होंने तुरंत FIR लिखवाई और दो सिपाहियों को भेजकर राहुल को उसी रात थाने में घसीट लाया गया।
---
**थाने में सजा का कमरा**
रात के १०:४५ बजे इंटरोगेशन रूम का दरवाजा बंद था। अंदर पत्थर की पुरानी दीवारें, एक छोटी खिड़की और बीच में एक लकड़ी का बेंच था।
**रीमा** अपनी पूरी खाकी यूनिफॉर्म में खड़ी थीं – शर्ट की आस्तीन चढ़ाई हुई, टाई कसी हुई, बाल बाँधे हुए। उनके दाहिने हाथ में वो मोटी, छेद वाली लकड़ी की **पट्टे (paddle)** थी जिससे हवा निकलती थी और मार और ज्यादा जलन भरी हो जाती थी।
राहुल को बेंच पर उल्टा लिटा दिया गया था। उसकी पैंट और अंडरवियर घुटनों तक सरका दी गई थी। उसके सफेद, नाजुक चूतड़ पूरी तरह नंगे थे। दोनों हाथ पीछे बाँध दिए गए थे और पैर बेंच की टांगों से मजबूती से बंधे हुए थे ताकि वो हिल भी न सके।
प्रिया कुर्सी पर बैठी हुई सजा देख रही थी। उसका चेहरा गुस्से और संतोष से भरा था।
रीमा ने राहुल के बाल पकड़कर उसका सिर ऊपर किया और कड़क स्वर में बोलीं,
“हरामी! मेरी छोटी बहन को छेड़ने की हिम्मत की? आज तेरी गाँड इतनी लाल और सूजी कर दूँगी कि एक हफ्ते तक बैठ नहीं पाएगा। कुल **१०० मार**... कोई माफी नहीं, कोई रुकना नहीं।”
राहुल घबराकर चीखा, “मैडम... प्लीज... गलती हो गई... आगे से कभी नहीं करूँगा... छोड़ दो... बहुत डर लग रहा है...!”
रीमा ने ठंडे स्वर में कहा, “डर अब लगेगा... पहले तो मजा ले रहा था ना?”
**सजा शुरू...**
**धड़ाक्क!!!**
पहली मार सीधे दोनों चूतड़ों के बीच पड़ी। पट्टे के छेदों की वजह से हवा निकली और मार बहुत तेज लगी। तुरंत लाल-लाल गोल निशान बन गए।
“आआआह...!” राहुल की पूरी देह तड़प उठी। उसकी आँखें फट गईं।
“एक...” रीमा ने गिनती शुरू की।
**धड़ाक्क! धड़ाक्क! धड़ाक्क!**
दूसरी, तीसरी... दसवीं मार तक राहुल के चूतड़ गहरे लाल हो चुके थे। जलन तेज होने लगी।
“मैडम... आह... बहुत दर्द हो रहा है... गाँड जल रही है... रो रहा हूँ... प्लीज बस कर दो...!” राहुल की आँखों में आँसू आ गए।
रीमा हँसते हुए प्रिया की तरफ देखा, “देख बहन, कितना रो रहा है ये। अभी तो सिर्फ १० हुई हैं।”
प्रिया बोली, “बहन जी, और जोर से मारो... इसने मुझे बहुत परेशान किया था।”
**३० से ६० मार – जलन बढ़ती गई**
अब रीमा ने रफ्तार बढ़ा दी। पट्टा हवा में “फुर्र” की आवाज करता हुआ बार-बार गिर रहा था। राहुल की गाँड अब पूरी तरह लाल हो चुकी थी, सूजन शुरू हो गई थी। हर मार के साथ उसके चूतड़ हिलते और जलन दोगुनी हो जाती।
“आह... उफ्फ... मर गया... गाँड फट रही है... बहुत तेज जलन... आँसू नहीं रुक रहे... मम्मी... बचाओ मुझे...!” राहुल बिलख-बिलखकर रो रहा था। उसकी नाक से पानी बह रहा था, मुँह से लार टपक रही थी। बंधे हाथ-पैर के कारण वो सिर्फ तड़प-तड़पकर चीख सकता था।
रीमा बीच-बीच में रुककर उसके सूजे हुए चूतड़ों को हाथ से जोर से दबातीं और कहतीं, “देख... कितना सुंदर लाल हो गया है। अभी ४० मार और बाकी हैं।”
**आखिरी ४० मार – सबसे क्रूर**
रीमा ने पट्टे को दोनों हाथों से पकड़ लिया और पूरी ताकत लगाकर मारना शुरू कर दिया।
**धड़ाक्क! धड़ाक्क! धड़ाक्क!**
हर मार अब पहले से दोगुनी तेज और भारी थी। राहुल की चीख अब फटी हुई आवाज में निकल रही थी।
“आआआह... बस... प्लीज... मैं मर जाऊँगा... गाँड में आग लग गई... बहुत दर्द... बहुत जलन... चीख रहा हूँ... रो रहा हूँ... माफ कर दो मैडम... प्रिया... मुझे माफ कर दो...!”
उसकी गाँड अब गहरे लाल-नीले निशानों से भर गई थी। सूजन इतनी हो गई थी कि चूतड़ अलग-अलग फूले हुए दिख रहे थे। हर नई मार पुरानी जलन को और भड़का रही थी। राहुल बार-बार बेंच को काटने की कोशिश कर रहा था, लेकिन कुछ नहीं कर पा रहा था। सिर्फ रो-रोकर भीख माँग रहा था।
**१००वीं मार**
रीमा ने आखिरी मार लगाई – सबसे जोर से, ठीक दोनों चूतड़ों के बीच।
**धड़ाक्क्क्क!!!**
राहुल की आखिरी चीख कमरे में गूँज गई। वो पूरी तरह बेहाल होकर बेंच पर पड़ा रह गया। सिर्फ सिसकियाँ निकल रही थीं। आँखों से आँसू लगातार बह रहे थे। उसकी गाँड अब टमाटर से भी ज्यादा लाल और फूली हुई थी।
रीमा ने पट्टा नीचे रखा, राहुल के बाल पकड़कर सिर ऊपर किया और बोलीं,
“अब याद रहेगी ना? मेरी बहन को छेड़ने की सजा। अगली बार फिर कोई हरकत की तो ये सजा दोगुनी होगी।”
प्रिया उठकर आई और राहुल की बुरी हालत वाली गाँड को देखकर बोली, “बहन जी... अच्छा हुआ। अब इसे सबक मिल गया।”
रीमा ने राहुल को खोल दिया। राहुल काँपते हुए गिर पड़ा। बैठने की हिम्मत नहीं हो रही थी। उसने रोते-बिलखते कपड़े पहने और बहुत मुश्किल से थाने से बाहर निकला। हर कदम पर जलन और दर्द से वो कराह रहा था।
रीमा ने प्रिया को गले लगाया और बोली, “चल बहन, अब घर चलते हैं।
0 Comments