खूबसूरत पुलिस वाली आंटी ने थाने मे सजा दी - Spanking Punishment Stories In Hindi
एक बार की बात है, मैं (राहुल) एक छोटे से शहर में रहता था। वहाँ की लोकल पुलिस स्टेशन में एक खूबसूरत पुलिस वाली आंटी काम करती थीं। उनका नाम था इंस्पेक्टर रीना शर्मा। उम्र करीब 38 साल, लेकिन देखने में 30 से ज्यादा नहीं लगती थीं। लंबी कद-काठी, गोरा रंग, तेज आँखें, और यूनिफॉर्म में उनकी कमर और कूल्हे ऐसे लगते जैसे किसी फिल्म की हीरोइन हों। उनकी मोटी जांघें और गोल-मटोल गांड यूनिफॉर्म के अंदर फिट होकर मेरी आँखों को हमेशा खींच लेती थीं।
मैं उन्हें बहुत पसंद करता था। रोज शाम को स्टेशन के पास घूमता रहता, बस एक झलक देखने के लिए। कभी-कभी उनसे बात भी कर लेता। वो मुझे “बेटा” कहकर पुकारतीं, लेकिन मेरे मन में तो उनके लिए कुछ और ही भाव थे। मैं अक्सर सोचता, “काश ये आंटी मुझे भी अपनी सजा दे देतीं।” एक दिन मौका मिल गया। शाम के वक्त स्टेशन के बाहर बेंच पर बैठे थे। मैं उनके पास जाकर बैठ गया और बात शुरू की।
“आंटी, आप पुलिस स्टेशन में अपराधियों को कितना मारती होंगी? सुनते हैं आप बहुत सख्त हो।”
रीना आंटी हँस दीं। उनकी हँसी में एक अजीब सा जादू था। बोलीं, “हाँ बेटा, बहुत अच्छे से लाल कर देती हूँ उनकी गांड। 20 पट्टे से कम नहीं मारती। पहले 30 मिनट मुर्गा बनाकर खड़ा रखती हूँ, घुटनों पर हाथ रखकर, सिर ऊपर। फिर उल्टा लिटा देती हूँ फर्श पर। गांड पर पट्टा, चप्पल, छड़ी – जो भी हाथ लगे। और सिर्फ मारना ही नहीं, और भी सजाएँ देती हूँ।”
मैं उत्सुक हो गया। दिल धड़कने लगा। “आंटी, एक बार बताओ ना… कोई केस बताओ जिसमें आपने किसी औरत को सजा दी हो।”
रीना आंटी ने इधर-उधर देखा, कोई नहीं था। फिर धीरे से बोलीं, “ठीक है, सुन। एक बार एक ड्रग्स बेचने वाली औरत पकड़ी गई थी। नाम था राखी। 32 साल की, थोड़ी मोटी, लेकिन गांड बहुत बड़ी और नरम। हमने उसे अंदर बुलाया। पहले तो 30 मिनट मुर्गा बनाया। उसके घुटने काँप रहे थे, पसीना छूट रहा था। फिर मैंने उसे उल्टा लिटा दिया फर्श पर। सलवार-कुर्ता ऊपर किया, पैंटी नीचे खींच ली। उसकी गोरी, मोटी गांड पूरी नंगी हो गई। मैंने पहले हाथ से थप्पड़ मारे – चटाक-चटाक! लाल हो गई। फिर पट्टा उठाया। 25-25 पट्टे दोनों तरफ। हर पट्टे पर वो चीखती, ‘आंटी माफ कर दो… जल रही है गांड!’ लेकिन मैं रुकी नहीं। गांड लाल-लाल, सूज गई थी।
फिर मैंने असली सजा दी। एक कपड़ा लिया, तेल में भिगोया। उसमें भारी भरकम मिर्च पाउडर मिलाया। कपड़े को एक मोटे डंडे में लपेटा। फिर उसकी गांड के छेद पर रखा और धीरे-धीरे अंदर सरका दिया। पूरा डंडा घुसा दिया। राखी जोर-जोर से चीखने लगी – ‘आआआह… जल रही है… आग लग गई… निकालो प्लीज!’ उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे। गांड के अंदर मिर्च का जलन इतना तेज था कि वो छटपटा रही थी, पैर पटक रही थी। 10 मिनट तक मैंने डंडा अंदर-बाहर किया। जलन और दर्द का मिश्रण था – जलन तो जैसे आग हो, दर्द तो जैसे चमड़ी फट रही हो। आखिर में जब निकाला तो उसकी गांड से धुआँ-सा निकल रहा था। वो रोते-रोते बेहोश हो गई।”
मैं सुनते-सुनते ही उत्तेजित हो गया था। लिंग खड़ा हो गया था। फिर आंटी ने दूसरा केस बताया। “एक और केस था। दो लेडी चोर पकड़ी गईं – रीमा और प्रिया। दोनों 28-30 साल की, सलवार-सूट में। हमने उन्हें फर्श पर लिटा लिया। पहले सलवार नीचे खींची, पैंटी हटाई। दोनों की गांडें नंगी। मैंने चप्पल उठाई और जोर-जोर से मारी। चटाक-चटाक-चटाक! हर चप्पल की आवाज़ गूंज रही थी। उनकी गांडें लाल पड़ गईं, सूज गईं। वो दोनों रो रही थीं, ‘आंटी बहुत दर्द हो रहा है… गांड फट गई!’ लेकिन मैंने 40-40 चप्पल मारे। फिर मुर्गा बनाकर 45 मिनट खड़ा रखा। उनके घुटनों में दर्द, कमर में ऐंठन, और गांड पर जलन – सब कुछ महसूस करा दिया।”
मैं अब खुद को रोक नहीं पा रहा था। बोला, “आंटी… आप बहुत खूबसूरत हो। मुझे भी एक बार आपकी सजा मिले ना। मैंने सोचा है कि आपकी सजा लेने का मन बहुत करता है। प्लीज आंटी… मुझे भी वही सजा दो जो अपराधियों को देती हो।”
रीना आंटी ने मुझे घूरा। उनकी आँखों में एक शरारती चमक आई। बोलीं, “अच्छा? तो चल आज रात ही थाने चल। वहाँ सजा मिलेगी। लेकिन याद रखना – एक बार शुरू किया तो रुकूँगी नहीं। बहुत दर्द होगा, बहुत जलन होगी। रोना, चीखना, गिड़गिड़ाना – सब सहना पड़ेगा।”
मैं तुरंत मान गया। रात 10 बजे थाने पहुँचा। अंदर कोई नहीं था, सिर्फ आंटी। उन्होंने दरवाजा बंद कर दिया। बोलीं, “कपड़े उतार, सिर्फ जाँघिया रख। फर्श पर मुर्गा बनकर खड़ा हो जा।”
मैंने काँपते हाथों से कपड़े उतारे। घुटनों पर बैठ गया, हाथ सिर पर। 30 मिनट बीते। मेरी जांघें काँप रही थीं, कमर दुख रही थी। पसीना बह रहा था। आंटी पास आईं, मेरी गांड पर हाथ फेरा। “अब असली मजा शुरू होता है बेटा।”
उन्होंने मुझे उल्टा लिटा दिया। जाँघिया खींचकर हटा दी। मेरी गांड पूरी नंगी। पहले हाथ से थप्पड़ मारे – चटाक! चटाक! जलन शुरू हो गई। फिर पट्टा उठाया। “20 पट्टे… गिनती कर!”
हर पट्टा पड़ा – “एक… आह!” “दो… दर्द हो रहा!” गांड पर लाल लकीरें पड़ गईं। 20 पट्टे के बाद गांड सूज गई थी, जल रही थी। लेकिन आंटी रुकीं नहीं। चप्पल उठाईं। 25-25 चप्पल दोनों तरफ। चटाक-चटाक की आवाज़ थाने में गूंज रही थी। मैं चीख रहा था, “आंटी बस… बहुत दर्द… गांड फट गई!” आँसू निकल आए। दर्द ऐसा कि लग रहा था चमड़ी उखड़ जाएगी। लेकिन साथ में एक अजीब सी उत्तेजना भी हो रही थी। लिंग खड़ा, पल-पल में और सख्त।
फिर आंटी ने वो खतरनाक सजा शुरू की। एक कपड़ा तेल में भिगोया। उसमें मिर्च पाउडर डाला। कपड़े को मोटे डंडे पर लपेटा। मेरी गांड के छेद पर रखा और धीरे-धीरे अंदर सरकाया।
“आआआह… आंटी… जल रही है… आग… आग लग गई!!” मैं जोर-जोर से चीखा। मिर्च का जलन अंदर फैल गया। जैसे हजारों सुई चुभ रही हों। गांड के अंदर आग-सी लग रही थी। जलन इतनी तेज कि मैं छटपटा रहा था, पैर पटक रहा था, रो रहा था। “निकालो आंटी… प्लीज… बहुत जलन… सह नहीं पा रहा!”
आंटी ने डंडा अंदर-बाहर करना शुरू किया। हर बार जलन बढ़ जाती। दर्द और जलन का मिश्रण – आँखों से पानी बह रहा था, साँस फूल रही थी। 10 मिनट तक वो चलता रहा। मेरी पूरी गांड अंदर-बाहर से जल रही थी। लिंग से पानी टपक रहा था उत्तेजना से, लेकिन दर्द इतना कि कुछ समझ नहीं आ रहा था।
आखिर में आंटी ने डंडा निकाला। मेरी गांड सूजी हुई, लाल-लाल, मिर्च से चमक रही थी। मैं फर्श पर लेटा रो रहा था। आंटी ने मेरे बालों में हाथ फेरा, बोलीं, “कैसी लगी सजा बेटा? अब बोल… और चाहिए?”
मैं काँपते हुए बोला, “आंटी… बहुत दर्द हुआ… लेकिन… आपकी सजा… मुझे पसंद आई।”
रीना आंटी मुस्कुराईं। “तो फिर अगली बार और सख्त सजा दूँगी।”
इस तरह वो रात मेरी जिंदगी की सबसे दर्द भरी, लेकिन सबसे यादगार रात बन गई। गांड पर अभी भी जलन महसूस हो रही थी, लेकिन मन में संतोष था – आंटी की सजा मैंने ली थी।
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